इन शेरों और गीतों से हमेशा जहन में जिंदा रहेंगे निदा फाजली

nida fazilहिन्दी और उर्दू के मशहूर शायर मुक्तदा हसन निदा फाजली ने सोमवार को इस दुनिया को अलविदा कह दिया. शब्दों का ये जादूगर इस दुनिया से भले ही रुख्सत हो गया हो लेकिन वो अपने पीछे शेरों-शायरी और कुछ चुनिंदा गीतों का ऐसा खजाना छोड़ गए हैं, जिसे दुनिया हमेशा अपने जहन में सहेज कर रखेगी.

निदा फाजली के कुछ मशहूर शेर

-बहुत मुश्किल है बंजारा मिज़ाजी

सलीक़ा चाहिये आवारगी में

-बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यों नहीं जाता

जो बीत गया है, वो गुज़र क्यों नहीं जाता

-घर से मस्जिद है बहुत दूर, चलो यूं कर लें

किसी रोते हुये बच्चे को हंसाया जाये

-कुछ लोग यूं ही शहर में हमसे भी ख़फ़ा हैं

हर एक से अपनी भी तबीयत नहीं मिलती

-मीरो ग़ालिब के शेरों ने किसका साथ निभाया है

सस्ते गीतों को लिख लिखकर हमने घर बनवाया है

-बात कम कीजे ज़हानत को छुपाते रहिये

ये नया शहर है कुछ दोस्त बनाते रहिये

दुश्मनी लाख सही ख़त्म ना कीजे रिश्ता

दिल मिले या ना मिले हाथ मिलाते रहिये

-कभी कभी यूं भी हमने अपने ही को बहलाया है

जिन बातों को ख़ुद नहीं समझे औरों को समझाया है

निदा फाजली के मशहूर गीत

-आई जंजीर की झन्कार, खुदा खैर कर (फिल्म रजिया सुल्ताना)

-होश वालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज है (फिल्म सरफ़रोश)

-कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता (फिल्म आहिस्ता-आहिस्ता) (पुस्तक मौसम आते जाते हैं से)

-तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है (फिल्म आहिस्ता-आहिस्ता)

-चुप तुम रहो, चुप हम रहें (फिल्म इस रात की सुबह नहीं)

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