उच्च शिक्षा सुधार के लिये विश्व बेंक से लोन

भोपाल, अप्रैल 2015/ पुराने कॉलेजों की अधोसंरचना ठीक करना प्राथमिकता है। सामान्यत: इसके बाद ही नये कॉलेज खोलने पर विचार किया जायेगा। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने यह बात विश्व बेंक टीम के सदस्यों से कही। सीनियर डायरेक्टर विश्व बेंक सुश्री क्लाउडिया कोस्टाइन के नेतृत्व में टीम ने उच्च शिक्षा में सुधार लाने विश्व बेंक द्वारा स्वीकृत किये जाने वाले सॉफ्ट लोन के संबंध में चर्चा की।

श्री गुप्ता ने कहा कि सॉफ्ट लोन में अधोसंरचना का कम्पोनेंट जरूर होना चाहिये। उन्होंने इस संबंध में टाइम बाउण्ड प्रोग्राम बनाने के निर्देश दिये। श्री गुप्ता ने कहा कि सामान्यत: कॉलेज के स्टॉफ का स्थानांतरण 5 वर्ष के पहले नहीं होता है।

सुश्री क्लाउडिया ने कहा कि कॉलेज को स्वायत्तता दी जाये। उनकी स्वयं की गवर्निंग बाडी होनी चाहिये। प्राध्यापकों का स्थानांतरण जल्दी-जल्दी नहीं होना चाहिये। प्राध्यापकों को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिलवाया जाये।

मध्यप्रदेश शासन द्वारा विश्व बेंक की सहभागिता से 26 हजार 230 करोड़ का एक प्रोजेक्ट बनाया है। इसमें 18 हजार 300 करोड़ विश्व बेंक द्वारा सॉफ्ट लोन दिया जायेगा। शासन द्वारा 7 हजार 930 करोड़ का अंशदान दिया जायेगा।

परियोजना में 6 विश्वविद्यालय में अधोसंरचना विकास, 50 नवीन महाविद्यालय में हॉस्टल निर्माण, 150 महाविद्यालय में अधोसंरचना विकास, 5 राज्य-स्तरीय संस्थान और राज्य-स्तरीय उत्कृष्टता संस्थान प्रारंभ करने सहित अन्य कार्यों की योजना है।

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