उज्जैन में राम-घाट पर तबला, पखावज और सितार-वादन

भोपाल, दिसम्बर 2015/ संस्कृति विभाग द्वारा उज्जैन की मोक्षदायिनी क्षिप्रा के तट पर ‘अनुगूँज’ सांस्कृतिक कार्यक्रम के दूसरे दिन ‘स्पंदन’ में संगीत के रसिक श्रोताओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम में समां अहमदाबाद की विदुषी डॉ. मंजू मेहता और उनके शिष्यों ने बाँधा।

क्षिप्रा के तट पर तबला, पखावज और सितार-वादन की ऐसी संगत संगीत-प्रेमियों के लिए सौगात थी। संगीत के विभिन्न वाद्य-यंत्र की संगत में राग सरस्वती और राग श्याम-कल्याण ने मधुर शास्त्रीय संगीत से पूरे राम-घाट को मंत्र-मुग्ध कर दिया। माँ सरस्वती की वीणा के विस्तार में तार वाद्यों की इस विशिष्ट संध्या को ‘स्पंदन’ का नाम दिया गया था।

क्षिप्रा-तट पर ही प्रसिद्ध चित्रकार लक्ष्मीनारायण भावसार ने राग सरस्वती और राग श्याम-कल्याण पर आधारित जीवंत चित्र उकेरकर संगीत संध्या को और आकर्षक बना दिया। रामघाट पर ‘अनुगूँज’ का शुभारंभ शंखघोष के साथ हुआ था। पारम्परिक रीति से माँ क्षिप्रा की महिमा और बाबा महाकाल का स्तुति-गान किया गया। संगीत संध्या में बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here