उद्यानिकी विकास में मध्यप्रदेश की बड़ी छलांग

भोपाल, अगस्‍त 2013/ मध्यप्रदेश ने बीते पाँच वर्ष में उद्यानिकी विकास के क्षेत्र में बड़ी छलांग भरी है। वर्ष 2008 की तुलना में वर्ष 2012 में इस कृषि प्रधान प्रदेश में उद्यानिकी फसलों का उत्पादन चार गुना बढ़ा है। इस दौरान फल, सब्जी, मसाला, फूल और औषधि एवं सुगंधित पौधों के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस दौरान उद्यानिकी फसलों का समग्र उत्पादन चार गुना,फलों का उत्पादन का उत्पादन तीने गुना से अधिक, सब्जी का उत्पादन लगभग चार गुना और मसाले का उत्पादन आठ गुना से अधिक बढ़ा है।

मध्यप्रदेश में वर्ष 2008-09 में उद्यानिकी फसलों का उत्पादन 44 लाख 7 हजार 661 मीट्रिक टन था। यह वर्ष 2012 में बढ़कर एक करोड़ 79 लाख 87 हजार 819 मीट्रिक टन हो गया। यह वृद्धि चार गुना से अधिक है।

फलों का उत्पादन वर्ष 2008-09 में 12 लाख 18 हजार 689 मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2012-13 में बढ़कर 37 लाख 84 हजार 623 मीट्रिक टन हो गया। यह वृद्धि तीन गुना से अधिक है। इस दौरान आम, केला, नीबू, मौसंबी, संतरा, अमरूद, पपीता, अनार,सिघाड़ा आदि फलों के उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है।

सब्जी उत्पादन में भी इस दौरान बहुत उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2008-09 में प्रदेश में सब्जी उत्पादन 26 लाख 80 हजार 423 मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2012-13 में बढ़कर एक करोड़ 8 लाख 55 हजार 943 मीट्रिक टन हो गया। यह वृद्धि चार गुना है। आलू, प्याज और टमाटर के साथ-साथ लौकी, अरबी, गोभी, मटर आदि के उत्पादन में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है।

मसाला उत्पादन में भी प्रदेश में इस दौरान 742.56 प्रतिशत की महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2008-09 में प्रदेश में मसाला उत्पादन 3 लाख 65 हजार 185 मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2012-13 में 30 लाख 76 हजार 918 मीट्रिक टन हो गया। मिर्च, अदरक, हल्दी, लहसुन, धनिया, जीरा, सौंफ का उत्पादन काफी बढ़ा है।

मध्यप्रदेश ने पहली बार फूलों के उत्पादन में बहुत अच्छी बढ़त हासिल की है। वर्ष 2008-09 में प्रदेश में फूलों का उत्पादन महज 1,578 मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2012-13 में बढ़कर एक लाख 58 हजार 199 मीट्रिक टन हो गया।

क्षेत्रफल विस्तार

मध्यप्रदेश में 5 साल में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्रफल 134.12 प्रतिशत बढ़ा है। वर्ष 2008-09 में प्रदेश में 5 लाख 55 हजार 155 हेक्टेयर में उद्यानिकी फसलें ली जाती थीं। वर्ष 2012-13 में 12 लाख 99 हजार 730 हेक्टेयर में यह फसलें ली गई।

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