उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग नीति निर्धारित

भोपाल, अप्रैल 2015/ खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग ने खरीफ विपणन वर्ष 2014-15 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग के लिये नीति निर्धारित की है। मिलिंग का कार्य इस वर्ष अनिवार्य रूप से 30 सितम्बर, 2015 तक पूरा किया जाने के लिये कहा गया है।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग ने कस्टम मिलिंग के लिये दिशा-निर्देश भी जारी किये हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2014-15 के दौरान उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग राज्य एजेंसियों द्वारा मिलर्स से अनुबंध कर भण्डारण-स्थल से न्यूनतम दूरी पर स्थित मिलों को प्राथमिकता देते हुए ‘पहले आओ-पहले पाओ” के सिद्धांत पर करवाई जायेगी। कस्टम मिलिंग अरवा चावल के साथ-साथ उसना चावल के रूप में भी की जाकर परिदान की जा सकेगी। अरवा चावल के लिये उपार्जन एजेंसी द्वारा मिलर्स को केन्द्र सरकार से निर्धारित मिलिंग दर के अतिरिक्त 25 रुपये प्रति क्विंटल तथा उसना चावल के लिये प्रथम तीन माह में मिलिंग कर भारतीय खाद्य निगम में जमा करने पर 15 रुपये प्रति क्विंटल तथा 3 माह बाद जमा करने पर 10 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि दी जायेगी।

कस्टम मिलिंग किये गये उसना चावल का परिदान अनिवार्य रूप से भारतीय खाद्य निगम को किया जायेगा। मिलर्स को परिवहन दर आयुक्त खाद्य, नागरिक आपूर्ति की अध्यक्षता में गठित राज्य-स्तरीय स्टेण्डिंग कमेटी द्वारा दी जायेगी। राज्य सरकार द्वारा उपार्जन एजेंसियों को मिलिंग पर दिये जाने वाले प्रोत्साहन राशि की भरपाई की जायेगी।

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