एन.एस.एस. गाँव नहीं परिवार गोद लें

भोपाल, जनवरी 2015/ राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के विद्यार्थी जिस गाँव में शिविर लगाएँ वहाँ एक विद्यार्थी एक परिवार को गोद ले। विद्यार्थी कम से कम साल भर उस परिवार के संपर्क में रहे। परिवार को शासन की जन-कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दे। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी ने यह बात राष्ट्रीय सेवा योजना की राज्य-स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में कही।

श्री जोशी ने कहा कि शिविर में गाँव के बच्चों को परंपरागत खेल खिलायें। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय बोली में गीतों की प्रस्तुति हो। पंचायत के कार्यों की रिपोर्ट भी विद्यार्थियों से बनवायी जाये। शिविरों में जन-प्रतिनिधि को भी जोड़ें। रक्तदान और जल-संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता दी जाये। वे संभाग एवं विश्वविद्यालय स्तर पर एनएसएस, एनसीसी और स्काउट गाइड की गतिविधियों की समीक्षा करेंगें। व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ठ की गतिविधियों से एन.एस.एस. के विद्यार्थियों को जोड़ा जाये।

बैठक में तय किया गया कि फरवरी माह में राज्य-स्तरीय एन.एस.एस. शिविर अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में लगेगा। शिविर के लिए स्थल का निर्धारण विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा किया जायेगा। बैठक में राज्य-स्तरीय पुरस्कार वितरण के संबंध में भी चर्चा हुई।

प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा के.के. सिंह ने कहा कि त्यौहारों के बाद तालाब-नदी के घाटों की सफाई करवायें। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलपति ने बताया कि 30 गाँव को गोद लिया जायेगा। प्रत्येक गाँव में दो-दो विद्यार्थी को भेजा जायेगा। विद्यार्थी ग्रामीणों को स्वच्छता अभियान सहित अन्य विषयों पर समझाइश देंगे। देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय के कुलपति ने बताया कि 1822 यूनिट रक्तदान करवाया गया। ग्वालियर विश्वविद्यालय द्वारा आदिवासी गाँव में शौचालय निर्माण और जबलपुर विश्वविद्यालय द्वारा नर्मदा घाटों की सफाई करवायी गयी।

बैठक में निर्णय लिया गया कि उज्जैन सिंहस्थ में सभी विश्वविद्यालय के एन. एस.एस. के विद्यार्थी शामिल हों। एक विद्यार्थी 20 दिन तक सिंहस्थ में रहे। बैठक में आयुक्त उच्च शिक्षा श्री सचिन सिन्हा, राज्य समन्वयक आर. के. विजय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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