ओंकारेश्वर नहर का विरोध औचित्यहीन

भोपाल, अप्रैल 2015/ नर्मदा घाटी विकास राज्य मंत्री लाल सिंह आर्य ने कहा है कि ओंकारेश्वर नहर से हजारों किसानों को सिंचाई लाभ देने का विरोध समझ से परे है। विरोध का औचित्य इसलिये भी नहीं है कि नहर चलाने के लिए जलाशय का स्तर 191 मीटर किये जाने से कोई भी घर, गाँव अथवा आबादी डूब के प्रभाव में नहीं है। राज्य सरकार ने 191 मीटर से आबादी विहीन डूब के प्रभाव के प्रमाण के लिए पिछले 15 अप्रैल को संपूर्ण क्षेत्र की हवाई फोटोग्राफी करवाई है। इससे प्राप्त फोटोग्राफ्स से बिल्कुल स्पष्ट है कि कथित जल सत्याग्रह का कोई औचित्य नहीं है।

श्री आर्य ने कहा कि राज्य सरकार और प्रदेश के मुख्यमंत्री ने परियोजना प्रभावितों के प्रति पूरी संवेदनशीलता प्रमाणित की है। पुनर्वास नीति में उपलब्ध भौतिक और आर्थिक सुविधाओं के अतिरिक्त 225 करोड़ का विशेष पैकेज डूब प्रभावित परिवारों को दिया गया है। डूब प्रभावित परिवारों ने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के उदारतापूर्वक पेकेज देने के निर्णय का स्वागत किया है। वे इसका लाभ लेकर जलाशय क्षेत्र रिक्त कर चुके हैं। केवल कुछ लोग विरोध कर रहे हैं। ऐसे विरोध के कारण हजारों किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री ने खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने का संकल्प लिया है। इसके लिये सिंचाई सुविधाओं का विस्तार पहली आवश्यकता है। सरकार ओंकारेश्वर नहर कमाण्ड क्षेत्र में बसे उन हजारों छोटे किसानों की पीड़ा से अवगत हैं जो पिछले दिनों ओला-वर्षा के कारण फसल का नुकसान उठाकर परेशान हैं। ओंकारेश्वर नहर उन्हें गरमी की जायद फसल उत्पादन का अवसर प्रदान करेगी।

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