कला, संस्कृति व साहित्य के प्रति दिखाई प्रतिबद्धता

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वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बजट में कला, संस्कृति व साहित्य के लिए 864 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है.

कला और संस्कृति के संवर्धन के लिए सरकार कृत संकल्प है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इसके लिए बजट में 864 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष के बजट 785 करोड़ रुपये से 79 करोड़ अधिक है.

जबकि वर्ष 2011-12 के दौरान कला संस्कृति को प्रमोट करने पर कुल 805 करोड़ रुपए खर्च हुए. इस तरह देखा जाए तो इस बार वित्त मंत्री ने कला, साहित्य, संस्कृति और लोक संगीत आदि को प्रमोट करने के लिए 864 करोड़ रुपये तय किया है, जो पिछले वर्ष किये गए खर्च से 59 करोड़ अधिक है.

वित्त मंत्री  ने सबसे ज्यादा मेहरबानी प्रदर्शन कलाओं (रंगमंच) पर दिखायी है. भारतीय साहित्य को प्रमोट करने के लिए साहित्य अकादमी को ज्यादा धन दिया है. इसके बाद  सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केन्द्र, ललित कला अकादमी, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा को दिया है. जबकि सबसे कम धन संगीत नाटक अकादमी को दिया है.

वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय नाटय़ विद्यालय (एनएसडी) के लिए इस बार 23.50 करोड़ का प्रावधान किया है, जबकि साहित्य अकादमी के लिए 19.50 करोड़ का प्रावधान किया है. नृत्य, नाटक और नाटय़शाला केन्द्र बनाये जाने के लिए इस बजट में 39.18 करोड़ की राशि रखी गयी है, जो पिछले बजट में तय 29.55 करोड़ की तुलना में 9.63 करोड़ अधिक है.

सरकार द्वारा तय 29.55 करोड़ की जगह नृत्य, नाटक और नाटय़शाला केन्द्र बनाये जाने पर सरकार ने इस वर्ष में 29.55 करोड़ की राशि खर्च की है. तय बजट से रंगशाला बनाने पर सरकार ने करीब 6.63 करोड़ अधिक खर्च किये इसके बाद सरकार की सबसे ज्यादा मेहरबानी एनएसडी पर हुई है.

एनएसडी को इस बार पिछले वर्ष की तुलना में 2.30 करोड़ अधिक मिला है जबकि साहित्य अकादमी को दो करोड़ ज्यादा मिला है. सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केन्द्र को 15.16 करोड़ मिला है जो पिछले वर्ष के 13.45 करोड़ से 1.75 करोड़ अधिक है.

वर्ष भर विवादों में रही ललित कला अकादमी को इस बजट में फायदा हुआ है. वित्त मंत्री ने ललित कला अकादमी को पिछले बजट में दिये गए 13.76 करोड़ की तुलना में इस बार 14.50 करोड़ दिया है जो पिछले बजट से 74 लाख अधिक है.

ललित कला अकादमी को मिला बजट इसलिए भी ज्यादा महत्व रखता है कि अकादमी को यह बजट तब मिला है जब उसने पिछले बजट में मिले 13.76 करोड़ की जगह महज 12.87 करोड़ ही खर्च किया है.

इस तरह से देखा जाय तो ललित कला अकादमी को इस बार 1.63 करोड़ अधिक मिला है. वित्त मंत्री ने पढ़ने लिखने वालों का भी ख्याल रखा है. प्रणव मुखर्जी ने इस बार दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी को 17 करोड़ दिया है जो पिछले वर्ष दिये गए 16.15 करोड़ से 85 लाख अधिक है.

जबकि इस दौरान (2011-12) के बीच दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी ने 16.70 करोड़ खर्च किया. सरकार राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा को भी प्रमोट करना चाहती है. इसके लिए वित्त मंत्री ने पिछले बजट में जहां 13.25 करोड़ का प्रावधान किया था उसे बढ़ाकर इस बार 14 करोड़ कर दिया गया है.

सरकार की उपेक्षा का शिकार संगीत नाटक अकादमी हुआ है. इसे इस बार बजट में पिछले वर्ष की तुलना में महज 20 लाख अधिक मिला है. पिछले बजट मे संगीत नाटक अकादमी को जहां 19.30 करोड़ रुपये मिला था जिसे इस बार बढाकर 19.50 करोड़ कर दिया गया है.

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के बजट में किसी भी तरह की कोई बढोतरी नहीं की गयी है. इसे पिछले वर्ष की तरह इस बार भी बजट में 25 करोड़ ही मिलेगा. इसके अलावा सरकार नृत्य, नाटक और नाटय़शाला केन्द्र बनाने पर 39.18 करोड़ खर्च करने का प्रावधान किया है.

पिछले बजट में यह 29.55 करोड था. जबकि इस दरम्यान 32.55 करोड़ खर्च हुआ. गांधी शांति पुरस्कार के लिए सरकार ने 1.55 करोड़, लाल बहादुर शास्त्री का जन्म शताब्दी समारोह मनाने के लिए 2.01 करोड़, खालसा विरासत परियोजना के लिए 6 करोड़ का प्रावधान किया है.

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