कूड़ा बीनने वाले बच्चों की परवरिश राशि बढ़ी

भोपाल, सितम्बर  2014/ गरीब, बेसहारा, अनाथ, कूड़ा-पन्नी बीनने वाले बच्चों के पोषण और संरक्षण की राशि में वृद्धि की गई है। महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह ने बताया कि मंत्रि-परिषद् द्वारा हाल ही में लिये गये इस निर्णय से लगभग 7000 बच्चे लाभान्वित होंगे। बच्चों की यह संख्या अस्थाई है। समय-समय पर जरूरतमंद बच्चों को भी इस योजना का लाभ दिया जायेगा।

महिला-बाल विकास मंत्री ने बताया कि समेकित बाल संरक्षण योजना के वित्तीय मापदंडों को भारत सरकार ने पुनरीक्षित किया है। तदनुसार राज्य सरकार ने भी इस योजना में राज्यांश की राशि में वृद्धि की है। मंत्रि-परिषद् द्वारा लिये गये निर्णय से पुनरीक्षित मापदंडों के अनुसार वर्ष 2014-15 से वर्ष 2016-17 तक तीन वर्ष में राज्य सरकार पर राज्यांश के रूप में 66 करोड़ 54 लाख 33 हजार रुपये का अतिरिक्त भार आयेगा।

इसके अनुसार बच्चों के खाने, रहने, उनके वस्त्र, शिक्षण-प्रशिक्षण और स्वास्थ्य पर खर्च की जाने वाली राशि अब 750 से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। बच्चों के बिस्तर के लिये प्रतिवर्ष व्यय की जाने वाली राशि अब 500 से बढ़ाकर 800 रुपये कर दी गई है। इसी तरह ऐसे बच्चों, जिनके माँ-बाप नहीं हैं और उनके रिश्तेदार उनका पालन-पोषण का दायित्व निभाते हैं उन्हें फास्टर-केयर योजना में दी जाने वाली 750 रुपये की राशि बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। स्पांसरशिप योजना में ऐसे बच्चों, जिनका कोई परिवार या रिश्तेदार नहीं है और समाज का कोई व्यक्ति उनका पालन-पोषण करता है, को प्रतिमाह दी जाने वाली 1000 की राशि बढ़ाकर 2000 रुपये कर दी गई है।

योजना में वित्तीय मापदंडों का पुनरीक्षण करने से 667 संविदा कर्मचारी भी लाभान्वित होंगे। योजना में विभिन्न श्रेणी के 7 आश्रय स्थल संचालित किये जा रहे हैं। इनमें शिशु, बाल, आश्रय, पश्चातवर्ती, संप्रेक्षण, विशेष और खुला आश्रय गृह शामिल हैं। इसके अलावा फास्टर-केयर और स्पांसरशिप योजना भी संचालित की जा रही है। इन सभी में वर्तमान में लगभग 7000 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।

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