क्षिप्रा तट पर बिखरे सुर बाँसुरी के

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भोपाल, दिसम्बर 2015/ उज्जैन में मोक्षदायिनी क्षिप्रा के तट पर बुधवार की चाँदनी रात ऐतिहासिक रही। मोक्षदायिनी के रामघाट पर यह पहला अवसर रहा जब पद्मभूषण पं.हरिप्रसाद चौरसिया ने बाँसुरी के सुर बिखराये। देश के शीर्षस्थ बाँसुरी वादक पं. हरिप्रसाद चौरिसिया ने बाँसुरी से राग यमन और राग पहाड़ी से ऐसा समा बाँधा कि रसिक श्रोता भी मंत्रमुग्ध होकर जैसे थम से गये। संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन द्वारा सिंहस्थ-2016 की स्वागत श्रेणी में तीन दिवसीय अनुगूँज किया गया था।

बाँसुरी से बरसते सुरों में पखावज की तान ने भी श्रोताओं को अपनी जगह से हटने नहीं दिया। राग यमन दो चरण में हरिप्रसाद चौरसिया द्वारा प्रस्तुत किया गया। प्रथम चरण में उन्हें पं.भवानीशंकर ने पखावज के साथ संगत दी। दूसरे चरण में बाँसुरी के साथ तबला वादक योगेश शम्सी ने संगत दी। इसके अलावा इसी मंच पर कृष्ण के जीवन पर आधारित लक्ष्मीनारायण भावसार की अदभुत और चमत्कारी चित्रकारी ने भी दर्शकों का मन मोहा।

अनुगूँज के पहले दिन 21 दिसम्बर को अनादि कायर्क्रम में ध्रुपद और ख्याल गायन, दूसरे दिन स्पन्दन के तहत सरस्वती और श्याम कल्याण और बुधवार को राम यमन और राग पहाड़ी ने क्षिप्रा तट को मंत्रमुग्ध किया। बुधवार की चाँदनी रात में राग पहाड़ी के साथ ही इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन हुआ।

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