खान नदी पुनर्जीवन परियोजना दो चरण में पूरी होगी

भोपाल, सितम्बर 2014/ लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने गंगा बेसिन में शामिल इंदौर की सरस्वती-चंद्रभागा (खान) नदियों के शुद्धिकरण के बारे में नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक में परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट दो भाग में तैयार करने पर चर्चा हुई। प्रथम भाग सिंहस्थ के पूर्व पूर्ण किया जा सकता है। दूसरे भाग में परियोजना को पूर्णत: लागू करने के बारे में कार्य होगा।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से दोनों नदी को जीवंत करने की 2719 करोड़ रुपये की योजना रखी। बताया कि वर्ष 2016 में होने वाले सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल में स्नान करने का अवसर मिले, इसके लिये शासन कटिबद्ध है। दिसम्बर, 2015 तक पहले चरण का कार्य पूरा करने की बात भी श्री चौहान ने कही। मुख्यमंत्री ने कहाकि दो हिस्सों में यह कार्य-योजना पूरी हो सकेगी। पहले चरण में सीवरेज ट्रीटमेंट का कार्य होगा। दूसरे चरण में अगले पाँच साल की प्लानिंग की जायेगी।

बैठक में, केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडू, जल-संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्री उमा भारती, राज्य मंत्री संतोष कुमार गंगवार, ग्रामीण विकास मंत्री नितिन गडकरी तथा वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन और विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय वरिष्ठ अधिकारियों सहित शामिल हुए।

बैठक में जल प्रवाह में जल-मल की रोकथाम, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का पूर्ण क्षमता से संचालन, जल प्रवाह के किनारों पर बसी आबादी के विस्थापन, जल प्रवाह के शुद्ध जल का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित करना आदि बिन्दु पर चर्चा हुई। इंदौर-उज्जैन को स्थाई रूप से बेहतर पर्यावरण और स्वच्छ जल की उपलब्धता और सिंहस्थ-2016 में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा पर भी चर्चा हुई।

श्रीमती महाजन ने कहा कि प्रोजेक्ट को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लिया जाए। गंगा बेसिन में आने वाली इंदौर की इन नदियों को स्वच्छ और जीवंत करने से क्षिप्रा सहित अन्य नदियाँ भी स्वच्छ रह सकेंगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन किया जाये।

बैठक में संभागायुक्त ने बताया कि नदी की लम्बाई 78 किलोमीटर है, जो नगरीय क्षेत्रों में 33 किलोमीटर है। स्थाई एवं अस्थाई अतिक्रमणें के कारण भी ये नदियाँ प्रदूषित हुई हैं। नदी क्षेत्रों में 33 स्लम्स हैं। प्रोजेक्ट के लिये लगभग 10 हजार परिवार को विस्थापित करना होगा। नदी तक आने-जाने के रास्ते, फुटपाथ और हरित क्षेत्र विकसित करने होंगे। नर्मदा-शिप्रा लिंक से चार-पाँच साल तक पानी छोड़ना होगा और फिर यहाँ जल-ग्रहण क्षेत्र विकसित हो जाएगा। प्रोजेक्ट के लिए एसपीवी का गठन करना प्रस्तावित है। सीवरेज सहित छह उपयोजनाएँ बनाना होगी। कुल 6 माह में डीपीआर बनाई जाएगी।

आईआईटी, कानपुर के प्रो. विनोद तारे ने दोनों नदी को बारहमासी बनाने संबंधी प्रेजेंटेशन दिया। तय हुआ कि प्रो. तारे और संभागायुक्त दुबे नेशनल रिवर मिशन के अंतर्गत कार्य-योजना प्रस्तुत करेंगे। प्रथम चरण में इंदौर की सीवरेज प्रणाली को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक जोड़ा जाएगा। इसके बाद उपचारित जल को उज्जैन के पूर्व डायवर्ट कर उज्जैन के आगे कालियादेह महल के पश्चात जोड़ा जाएगा। इंदौर के प्रस्तावित कार्य वर्तमान में लगभग 400 करोड़ रुपये के होंगे, जिसके लिये केन्द्र की विभिन्न योजनाओं में राशि स्वीकृत की जायेगी। दूसरे चरण में किनारों की बसाहट का विस्थापन और रिवर फ्रंट डेवलपमेंट का कार्य किया जाएगा। दोनों चरण की योजना के लिए शीघ्र ही विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाकर स्वीकृति ली जाएगी।

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