‘खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी’

 

subhadra-kumari-chaouhanसिवनी जिला के ग्राम कलबोड़ी में प्रसिद्ध कवित्री और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुभद्रा कुमारी चौहान की पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी समाधी स्थल पर एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

इस आयोजन में सुभद्रा कुमारी चौहान स्मृति समिति के अध्यक्ष मोहन चन्देल सहित ग्रामीणों और स्कूलों के बच्चों ने सुभद्रा कुमारी चौहान की समाधी पर पुष्प माला अर्पित की.

साथ ही इस मौके पर बच्चों ने सुभद्रा कुमारी द्वारा रचित बुंदेलो हर बोलो के मुंह हमने सुनी कहानी थी सहित तमाम कविताओं को पढ़ कर उन्हें याद किया.

गौरतलब है की 15 फरवरी 1948 को एक सड़क दुर्घटना में सुभद्रा कुमारी चौहान की सिवनी के ग्राम कलबोड़ी में मौत हो गई थी.जिसके बाद घटना स्थल पर उनकी समाधी बनाई गई. इस समाधी पर हर साल ग्रामीणों द्वारा 15 जनवरी के दिन श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है.

‘झांसी की रानी’ से मिली प्रसिद्धी

सुभद्रा कुमारी चौहान हिन्दी की सुप्रसिद्ध कवयित्री और लेखिका थीं. उनके दो कविता संग्रह और तीन कथा संग्रह प्रकाशित हुए पर उनकी प्रसिद्धि ‘झांसी की रानी’ कविता के कारण है.

ये राष्ट्रीय चेतना की एक सजग कवयित्री रही हैं. भारतीय तटरक्षक सेना ने 28 अप्रैल 2006 को सुभद्रा कुमारी चौहान की राष्ट्रप्रेम की भावना को सम्मानित करने के लिए नए नियुक्त एक तटरक्षक जहाज को सुभद्रा कुमारी चौहान का नाम दिया गया.

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