खेल मैदान और खेल सामग्री के लिये नीति बनी

भोपाल, जनवरी 2015/ राज्य शासन ने शासकीय स्कूलों में खेल सुविधाओं के विकास के लिये नीति बनाई है। नीति के क्रियान्वयन से खेल मैदान का निर्माण, सुदृढ़ीकरण और खेल उपकरण एवं खेल सामग्री को खरीदा जायेगा। शासन ने स्कूल शिक्षा विभाग के सभी संभागीय संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी और विद्यालय प्रमुखों को नीति का अक्षरश: पालन करवाने के निर्देश दिये हैं।

नीति द्वारा खेल मैदान के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण का लक्ष्य निर्धारित कर यह देखा जायेगा कि किस संभाग में कौन-कौन-से खेल के लिये सुविधाओं का विकास किया जाना उपयुक्त है। लक्ष्य निर्धारित करते समय अंचल में प्रचलित खेलों एवं खिलाड़ियों की प्रतिभा तथा जरूरतों आदि को संज्ञान में लिया जायेगा। सबसे पहले संभाग-स्तर पर खेल सुविधाओं का विकास होगा, बाद में जिलों में चरणबद्ध तरीके से खेल सुविधाओं का विकास होगा। यदि एक साल में कार्य पूरे नहीं होते हैं तो अगले सालों में उसे पूरा करने के लिये जरूरी राशि दी जायेगी। खेल मैदान के निर्माण और सुदृढ़ीकरण के लिये शासकीय एजेंसी द्वारा तैयार किया गया प्राक्कलन ही मान्य होगा।

नीति में खेल सामग्री, उपकरण को खरीदने के लिये भी प्रावधान किये गये हैं। स्कूलों में खेल सामग्री, उपकरण की खरीदी के लिये जिला-स्तर पर तकनीकी समिति बनेगी। समिति में व्यायाम शिक्षक, उत्कृष्ट खिलाड़ी एवं खिलाड़ी विद्यार्थियों को शामिल किया जायेगा। खुली निविदा के जरिये गुणवत्ता के आधार पर नियमानुसार सामग्री खरीदी जायेगी। समय-समय पर सामग्री का भौतिक सत्यापन भी करवाया जायेगा। इण्डोर गेम्स के लिये जिलों में मल्टीपर्पज हॉल का निर्माण होगा।

खेल सामग्री उपकरण खरीदने के प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। सभी संस्था प्रमुख विद्यार्थियों की अभिरुचि, प्रतिभा, परिवेश, परम्परा एवं उपलब्ध संसाधन के आधार पर विद्यालय की खेलकूद विकास योजना तैयार कर अनुमोदन के लिये डीईओ को प्रस्तुत करेंगे। डीईओ जिले के सभी विद्यालय के प्रस्तावों की एकजाई समीक्षा कर समग्र खेलकूद विकास योजना तैयार करेगा। योजना के आधार पर सुदृढ़ीकरण एवं सामग्री खरीदने के लिये विद्यालयवार प्रस्ताव प्राप्त कर जिले का पूरा प्रस्ताव संभागीय संयुक्त संचालक को भेजा जायेगा। संभागीय संयुक्त संचालक जिलों में प्रचलित खेल, विद्यार्थियों की अभिरुचि आदि को देखते हुए संभाग का समग्र प्रस्ताव तैयार कर संचालनालय को भेजेंगे।

संचालनालय प्रस्ताव के परीक्षण के बाद अनुमोदित प्रस्ताव के क्रियान्वयन के लिये बजट राशि जारी करेगा। प्राप्त बजट के अनुसार संभाग में कार्य करवाने का उत्तरदायित्व संभागीय संयुक्त संचालक पर होगा। जिला एवं संभाग द्वारा प्रत्येक विद्यालय में उपलब्ध खेल सुविधाओं, खिलाड़ियों, खेल उपकरणों आदि का रिकार्ड संधारित किया जायेगा। निरीक्षण के दौरान इसकी समीक्षा भी होगी। सुदृढ़ीकरण एवं खरीदी जाने वाली खेल सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये संभाग-स्तर पर सहायक संचालक (खेल), जिला खेल अधिकारी एवं खेल निरीक्षक उत्कृष्ट खिलाड़ियों, व्यायाम शिक्षकों की एक-एक समिति का गठन करेंगे। समिति संभाग में इन कार्य की निरंतर मॉनीटरिंग करेगी तथा कार्य पूरा होने के बाद उसका सत्यापन कर संचालनालय को रिपोर्ट भेजेगी।

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