खेल संघों की मान्‍यता के नए नियम जारी

भोपाल। राज्य शासन द्वारा लिये गये नीतिगत निर्णय के अनुसार खेल एवं युवा कल्याण विभाग में कार्यरत राज्य-स्तरीय खेल संघों के मान्यता संबंधी नियम जारी कर दिये गये हैं। इसका उद्देश्य राज्य-स्तरीय खेल संघों का सुदृढ़ीकरण तथा उन्हें मान्यता प्रदान कर प्रशासकीय एवं कार्यालयीन कार्यों के लिये आर्थिक सहयोग देना है। यह नियम ‘खेल संघों के मान्यता नियम-2012’ कहलायेंगे।

परिभाषा तथा पात्रता

संचालनालय खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा मान्यता उन्हीं खेल संघों को दी जायेगी, जो खेल ओलम्पिक, एशियन गेम्स तथा राष्ट्रीय खेलों में शामिल होंगे। पात्रता के अनुसार खेल संघ/संस्था को पंजीयक र्फम्स एवं संस्थाएँ से पंजीकृत होना चाहिये। संघ/संस्था, प्रोपराइटरी या पार्टनरशिप (साझेदारी) फर्म न हो। इसी तरह संघ/संस्था का उद्देश्य सिर्फ उसी संबंधित खेल के विकास/संचालन से होना चाहिये, दूसरे खेलों से नहीं। संघ/संस्था का लिखित संविधान होना अनिवार्य है।

खेल/संस्था विगत तीन वर्ष से जिला, संभाग तथा राज्य-स्तर पर अपने खेल की गतिविधियाँ संचालित कर रही हों तथा उसकी 50 प्रतिशत जिला इकाइयाँ हों। प्रथम बार मान्यता के लिये प्रत्येक खेल संघ को उसके द्वारा कम से कम 33 प्रतिशत जिलों में विगत तीन वर्ष में आयोजित की गई जिला, संभाग तथा राज्य-स्तरीय प्रतियोगिता का विवरण, जिसमें आयोजन की तिथि, स्थान, खिलाड़ियों की संख्या (नाम सहित), फोटोग्राफ्स और पेपर कटिंग प्रस्तुत करना होगा। तदोपरांत ही संस्था मान्यता के लिये पात्र होगी। खेल संचालनालय से मान्यता के समय संघ/संस्थाओं को तकनीकी कारणों को छोड़कर विगत 3 वर्ष का सब-जूनियर, जूनियर, सीनियर, राज्य-स्तरीय प्रतियोगिता का विधिवत प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा। संघ/संस्थाओं की राज्य-स्तरीय प्रतियोगिता के आयोजन के पूर्व उनके द्वारा जिला-स्तरीय प्रतियोगिता विधिवत रूप से आयोजित की गई हो। अनुदान के लिये मान्यता संबंधित वित्तीय वर्ष के लिये मान्य रहेगी।

शर्तें

अन्य शर्त में राज्य/संभाग/जिला-स्तरीय खेल संघ/संस्था के अध्यक्ष/सचिव/कोषाध्यक्ष का कार्यकाल भारत सरकार के मान्यता नियम के दिशा-निर्देशानुसार निर्धारित किया जायेगा। खेल संघ का कोच किसी संघ का पदाधिकारी नहीं होगा। एक खेल संघ का पदाधिकारी किसी दूसरे खेल संघ का नहीं होगा, परंतु वह मध्यप्रदेश ओलम्पिक संघ में पदाधिकारी हो सकता है। संघ/संस्थाएँ अपने खाते का विधिवत रख-रखाव करती हों। उसके खाते का वार्षिक लेखा परीक्षण किसी पंजीकृत चार्टड अकाउंटेंट तथा आवश्यकता होने पर खेल संचालनालय के ऑडीटर द्वारा किया हो। संघ/संस्था का अपना पेन नम्बर होना आवश्यक है। उनके द्वारा इनकम टैक्स रिटर्न जमा करना अनिवार्य होगा। विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त खेल संघ/संस्था के खिलाड़ियों को संचालन/प्रतियोगिता, अनुदान, राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक प्राप्त करने पर नगद पुरस्कार, खेल वृत्ति, खेल अलंकरण इत्यादि के लिये पात्रता होगी।

इसी प्रकार खेल संघ/संस्थाओं को सूचना का अधिकार नियम-2005 अनिवार्य रूप से लागू करना होगा। प्रदेश में एक खेल के एक ही संघ को राज्य-स्तरीय संघ की मान्यता दी जायेगी, जो संबंधित खेल के राष्ट्रीय महासंघ से संबद्ध हो। राष्ट्रीय खेल महासंघ उन्हें माना जायेगा, जो भारत सरकार से मान्यता प्राप्त हों। खेल संघ/संस्थाओं की साधारण सभा की बैठक संघों के पदाधिकारियों का चुनाव अथवा ऐसी बैठक, जिसमें महत्वपूर्ण निर्णय लिये जाने हों, उस बैठक की सूचना खेल संचालनालय को 15 दिवस पूर्व लिखित रूप से अनिवार्यत: देनी होगी। इससे खेल संचालनालय अपना पर्यवेक्षक बैठक में सम्मिलित करा सके।

संघ/संस्था अपना अंकेक्षण प्रतिवेदन वित्तीय वर्ष की समाप्ति के दो माह के भीतर खेल संचालनालय को प्रस्तुत करेगा। इसमें वर्ष भर की खेल गतिविधियों का प्रतिवेदन अनिवार्यत: शामिल होगा। प्रत्येक खेल संघ/संस्था की वर्ष में एक बार साधारण सभा तथा 4 वर्ष में एक विशेष बैठक आयोजित की जाना होगी। इसमें संघ/संस्था के पदाधिकारियों का चुनाव होगा। खेल संघ/संस्था के सदस्यों में 25 प्रतिशत सदस्य ख्याति-प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी होना चाहिये, जहाँ अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी न हों, राष्ट्रीय खेल/राष्ट्रीय चेम्पियनशिप के पदक-विजेता खिलाड़ी हों। खेल संघ के राष्ट्रीय महासंघ/संघ को भारतीय ओलंपिक संघ से मान्यता होना आवश्यक है। खेल संघ/संस्था का मान्यता संबंधी आवेदन दो प्रति में संचालक खेल को अनिवार्यत: देना होगा। संघ को चुनाव में निष्पक्ष, पारदर्शी तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाना होगी।

मान्यता

मान्यता की शर्तों में राज्य-स्तरीय खेल संघों को मान्यता तथा नवीनीकरण संबंधी आवेदन उसी वित्तीय वर्ष के 30 जून तक संचालनालय अथवा संबंधित जिला खेल और युवा कल्याण अधिकारी के कार्यालय में करना अनिवार्य होगा। इसके पश्चात प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जायेगा। राज्य खेल संघ/संस्था को मान्यता खेल संचालक द्वारा दी जायेगी, जो संबंधित वित्तीय वर्ष के लिये मान्य रहेगी। संघ/संस्थाओं के वित्तीय लेखा-जोखा में अनियमितता पाई जाने पर उनकी मान्यता निरस्त की जा सकेगी। किसी भी संघ/संस्था की मान्यता निरस्त/निलम्बित करने का अधिकार राज्य शासन के पास सुरक्षित रहेगा।

नवीनीकरण तथा विवादों का निराकरण

मान्यता के नवीनीकरण के संबंध में एक बार मान्यता के पश्चात मान्यता नवीनीकरण के लिये आगामी वर्ष में विगत वर्ष की उपरोक्तानुसार जानकारी प्रस्तुत करना होगी। विवादों के निराकरण में शासन इन नियमों में शिथिलीकरण/परिवर्तन/संशोधन आवश्यकता अनुसार कर सकेगा। खेल संघ/संस्था का विभाग से विधिक विवाद होने की स्थिति में विभागीय मान्यता, निराकरण होने तक स्थगित रहेगी तथा निर्णय उपरांत ही आवश्यक कार्यवाही की जायेगी।

उल्लेखनीय है कि उक्त नियम के प्रभावशील होने से खेल संघों को मान्यता संबंधी समस्त प्रचलित नियम, आज्ञाएँ और विज्ञप्तियाँ निरस्त हो जायेगी। ऐसे खेल जिनकी अधोसंरचना/उपकरण सभी जिलों में उपलब्ध नहीं हों, जैसे वॉटर-स्पोर्ट्स, घुड़सवारी, शूटिंग, आर्चरी, साइक्लिंग, फेंसिंग, तैराकी, बॉउलिंग एवं बिलियर्ड-स्नूकर खेलों पर यह लागू नहीं होगा।

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