गीता के उपदेशों को व्यावहारिक जीवन में उतारें

भोपाल, अप्रैल 2015/ ऊर्जा एवं जनसंपर्क मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि आदर्श समाज की स्थापना के लिये गीता के उपदेशों को व्यावहारिक जीवन में उतारने की आवश्यकता है। उन्होंने दुनिया में भारत की पहचान आध्यात्मिक शक्ति के रूप में कायम रखने के लिये युवा पीढ़ी द्वारा गीता का सतत अध्ययन करने की बात कही। श्री शुक्ल लाल परेड ग्राउण्ड पर गीता फेस्ट-2015 को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में पूज्य महा मण्डलेश्वर हरिहरानंद जी ने ‘श्रीमदभगवत् गीता और विद्यार्थी” विषय पर मुख्य वक्तव्य दिया।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि गीता के ज्ञान से मन, बुद्धि, आत्मा को सुख मिलता है। एकात्म मानवतावाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय को भी जीवन में गीता से प्रेरणा मिली। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा रचित गीता रहस्य का कर्मयोग क्रांतिकारियों का मंत्र बन गया। अंग्रेजों ने प्रतिशोध की भावना से इस पर प्रतिबंध भी लगाया था। विश्व का ऐसा कोई दर्शन या धर्म ऐसा नहीं है, जो गीता से अनुप्रेरित न हो। मानव समाज को जागृत एवं कर्म के प्रति उत्प्रेरित करने का सर्वप्रथम उदघोष गीता से हुआ। उन्होंने गीता के दर्शन का व्यापक प्रचार-प्रसार किये जाने पर भी जोर दिया।

पूज्य महा मण्डलेश्वर हरिहरानंद जी ने कहा कि विद्यार्थियों को नियमित रूप से गीता के उपदेशों का अध्ययन करवाना चाहिये। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में गीता प्रेरणा-पुँज रही है। इससे प्रेरित होकर युवाओं एवं भारतीयों ने जान की परवाह किये बगैर देश की आजादी के लिये संघर्ष किया। भारत की प्राचीन गौरवशाली संस्कृति की चर्चा करते हुए श्री हरिहरानंद जी ने गीता को देश के श्रेष्ठ ग्रंथों में से एक माना। कार्यक्रम को अनूपपुर के विधायक रामलाल रोतेल एवं भगवतशरण माथुर ने भी संबोधित किया।

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