गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं

भोपाल, अप्रैल 2015/ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सड़कों की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं हो। अच्छा कार्य करने वालों को पुरस्कृत किया जाये तथा कार्य में गड़बड़ी अथवा विलंब के प्रकरणों में दंडात्मक कार्रवाई भी की जायें। वर्षा ऋतु में सभी प्रमुख मार्ग मोटरेबल रहें। समय रहते इसके आवश्यक प्रबंध कर लें। वे यहाँ लोक निर्माण विभाग की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में लोक निर्माण मंत्री सरताज सिंह भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता के लिए सतत मॉनीटरिंग की जाये। निरीक्षण प्रतिवेदनों की भी समीक्षा हो। ऐसे स्थान चिन्हित किये जायें जो नियमित मानीटरिंग में छूट जाते हैं। उनकी मानीटरिंग के लिए प्रशासनिक संरचना में भी आवश्यक संशोधन किये जायें। शहरों की यातायात व्यवस्था में नागरिक सुरक्षा सर्वोच्च है। ऐसे नगरों जहाँ शहरों पर यातायात का दबाव अधिक है उनके लिए रिंग रोड निर्माण का मॉडल बनायें। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 तक प्रदेश की सभी सड़कें दुरूस्त हो जाना चाहिये।

सड़कें विकास की प्रथम आवश्यकता हैं। ग्रामीण विकास और लोक निर्माण विभाग संयुक्त रूप से 2018 तक सड़कों के निर्माण का खाका तैयार करें। मंडी निधि की प्रधानमंत्री सड़क योजना संधारण व्यय के बाद शेष राशि का भी इस कार्य में उपयोग करने की सम्भावनाओं के परीक्षण की भी जरूरत बतलाई। उन्होंने सलकनपुर – मालीवाँया से बुदनी मार्ग को फोर-लेन बनाने की भी जरूरत बतायी। मुख्यमंत्री की घोषणाओं की भी समीक्षा की। साथ ही सिंहस्थ के निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूर्ण करने के लिये निर्देश दिये।

बैठक में बताया गया कि विभाग द्वारा वर्ष 2014-15 के लक्ष्य 2500 किलो मीटर सड़क निर्माण की तुलना में 2722 किलो मीटर की उपलब्धि अर्जित की है। विभाग द्वारा 19 हजार किलो मीटर प्रमुख जिला सड़क नेटवर्क का अगले 5 वर्ष में उन्नयन किया जाएगा। मुख्यमंत्री कांट्रेक्टर योजना प्रशिक्षण के प्रथम चरण में 426 इंजीनियर्स का प्रशिक्षण पूर्ण हो गया है। दूसरे चरण के लिए 491 अभ्यर्थियों द्वारा पंजीयन करवाया गया है।

बैठक में लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल, म.प्र. सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक मनीष रस्तोगी, वित्त सचिव अनिरूद्ध मुखर्जी, मुख्यमंत्री के सचिव हरिरंजन राव एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

प्रमुख निर्णय

सीमेंट-कांक्रीट सड़कें बनेंगी।

मुख्यमंत्री स्वयं सड़कों की गुणवत्ता परखेंगे।

पर्यटक-स्थलों के मार्ग उन्नयन को प्राथमिकता।

इंजीनियरों की दक्षता और बढ़ाई जायेगी।

भारतीय सड़क कांग्रेस का 76वाँ अधिवेशन इंदौर में।

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