ग्रह-नक्षत्र की जानकारी के लिये लगायेंगे पौधे

भोपाल, अगस्त 2015/ विद्यार्थियों को ग्रह-नक्षत्र के साथ-साथ वृक्षों की जानकारी देने के लिये स्कूल के खुले मैदान में नक्षत्र-वाटिका स्थापित की जायेगी। राज्य शासन ने स्कूल शिक्षा के संभागीय और जिला अधिकारियों को 30 अगस्त तक नक्षत्र-वाटिका संबंधी कार्य को पूरा करवाने के निर्देश दिये हैं। नक्षत्र-वाटिका के कार्य में वन, सामाजिक न्याय और कृषि विभाग के अधिकारियों से सहयोग लेने को कहा गया है।

नक्षत्र-वाटिका के लिये स्थानीय कॉलेज के वनस्पति विभाग से मिट्टी, खाद और कीट-नाशक के बारे में भी मार्गदर्शन लेने के निर्देश दिये गये हैं। पौध-रोपण के बाद उनकी देखभाल ‘बाल केबिनेट” करेगी। जिला मुख्यालय के ऐसे विद्यालय, जहाँ प्राथमिक से हायर सेकेण्डरी स्तर तक की कक्षाएँ और प्रांगण में खुला मैदान है, वहाँ नक्षत्र-वाटिका स्थापित होगी। नक्षत्र-वाटिका के लिये वर्षाकाल का समय इसलिये चुना गया है कि इस समय अधिकाधिक पौध-रोपण से पौधे आसानी से लग जाते हैं।

नक्षत्र-वाटिका के लिये खुला मैदान और बाउण्ड्री-वॉल वाले विद्यालयों का चयन किया जा रहा है। चयनित विद्यालयों की सूची वन एवं कृषि विभाग को भेजी जायेगी। लगाये गये पौधे की वृद्धि देखने तथा समय-समय पर पानी, खाद, मिट्टी की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जायेगी। पौधों की सुरक्षा के लिये तार/ट्री-गार्ड भी लगाये जायेंगे। विकसित होने पर नक्षत्र के अनुसार पौधों के नाम अंकित किये जायेंगे। कक्षा 5 से 12वीं तक के बच्चों के छोटे-छोटे समूह तैयार किये जायेंगे। समूह एक-एक वृक्ष की निरंतर देखरेख कर उनके जीवन पर प्रोजेक्ट तैयार करेंगे। नक्षत्र-वाटिका में लगाये गये पौधों के औषधीय गुणों की जानकारी बच्चों को दी जायेगी। यही पौधे आगे चलकर वृक्ष के रूप में विकसित होंगे।

नक्षत्र-वाटिका में नक्षत्र एवं ग्रह के अनुसार 27 प्रकार के पौधे लगवाये जायेंगे। इनमें अश्विनी नक्षत्र का कुचला, भरणी-आँवला, कृत्तिका-उदुंबर/गूलर, रोहिणी-जामुन, मृगशिरा-खैर, आर्द्रा-कृष्णागुरु, पुनर्वसु-बाँस, पुष्य-पीपर, अश्लेषा-चंपा, मघा-बड़वट, पूर्वा फाल्गुनी-पलाश, उत्तरा फाल्गुनी-कनेर, हस्त-चमेली, चित्रा-बेल, स्वाति-कांहा/कोह, विशाखा-कैथ, अनुराधा-मौलसरी, ज्येष्ठा-शाल्मली/सेवर, मूल-साल/सखुआ, पूर्वाषाढ़ा-वैंत, उत्तराषाढ़ा-कटहल, श्रवण-आंकड़ा, धनिष्ठा-समी/सफेद कीकर, शतभिषा-कदंब, पूर्वभाद्रपदा-आम, उत्तराभाद्रपदा-नीम और रेवती-महुआ शामिल हैं।

विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट वर्क के रूप में वाटिका पर डाटा संग्रह का कार्य सौंपा जायेगा। इसमें उन्हें वृक्ष का नाम, लगाने की तिथि, एक माह में हुए परिवर्तन, फूल आने एवं लगने का समय, औषधीय वृक्ष का नाम, किस रोग में लाभकारी तथा किस रूप में उपयोग किया जा सकता है, संबंधी जानकारी एकत्रित की जायेगी।

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