ग्रामीण शिल्पियों को बाजार उपलब्ध करवाना जरूरी

भोपाल, मार्च 2013/ वित्त मंत्री राघवजी ने ग्रामीण शिल्पियों तथा कारीगरों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने के समुचित अवसर और बाजार उपलब्ध करवाने की आवश्यकता पर बल दिया है। वे जन-अभियान परिषद् के ‘सृजन मेला-2013’ का शुभारंभ कर रहे थे। इस अवसर पर परिषद के उपाध्यक्ष द्वय प्रदीप पाण्डेय और डा. अजयशंकर मेहता भी उपस्थित थे।

श्री राघवजी ने कहा कि छोटे उद्यम ज्यादा लोगों को रोजगार देते हैं। उन्होंने जबलपुर में लिज्जत पापड़ उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें कुछ करोड़ की लागत से ही 3000 से अधिक महिला को रोजगार मिल रहा है। शासकीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सक्रिय जन-सहयोग से ही संभव है। जन-अभियान परिषद् द्वारा समुदाय को विकास गतिविधियों से जोड़ने का कार्य सराहनीय है। परिषद् के कार्य निचले स्तर तक पहुँच रहे हैं जिससे गाँवों का तेजी से उत्थान हो रहा है।

उपाध्यक्ष डा. मेहता ने बताया कि राज्य स्तर पर यह पहला सृजन मेला लगाया गया है। इसमें प्रदेश के सभी 313 विकासखण्ड के शिल्पी अपने शिल्पों का प्रदर्शन और विक्रय करेंगे। इनमें मेले में शिल्पों के अलावा व्यंजन, देशी उपचार, बोन्साई वृक्ष, देशी तकनीक से बने उपकरण आदि का प्रदर्शन किया गया है।

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