जनजातीय भाषा और संस्कृति का विकास हो

भोपाल, मार्च 2013/ आदिम-जाति कल्याण मंत्री कुँवर विजय शाह ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने राज्य जनजातियों की संस्कृति, भाषा एवं परम्पराओं के संरक्षण के लिए संकल्प लिया है। पिछले 9 वर्ष में इस दिशा में काफी कुछ किया गया है। प्राथमिक शिक्षा के जरिये जनजातीय भाषा और संस्कृति के विकास के लिए भी कार्य किए जाने की जरूरत है।

श्री शाह भोपाल में ‘जनजातीय भाषाएँ और शिक्षा’ पर केन्द्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने बताया कि मध्यप्रदेश में आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए भिलाली, गोंडी शब्दकोष तैयार किए गए हैं। चालीस गोंडी मौखिक कथाओं का संकलन एवं हिन्दी अनुवाद किया गया है। आदिम-जाति अनुसंधान एवं विकास संस्था (टी.आर.आई.) ने भीली, भिलाली एवं गोंडी के पारम्परिक गीतों को संगीतबद्ध कर उनकी स्वरलिपि तैयार की है। जनजातीय भाषाओं के व्याकरण को भी तैयार किया जा रहा है। टी.आर.आई के ये सब प्रयास अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय हैं। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी के निष्कर्षों को प्रदेश की जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रभावी ढंग से लागू किया जायेगा।

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