ज्ञानार्जन प्रोजेक्ट ने दिलाई मण्डला जिले को राष्ट्रीय पहचान

mandlaशैक्षणिक सुधार के लिये मण्डला जिले में लागू नवाचार ज्ञानार्जन प्रोजेक्ट ने राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनाई है। बीते सोमवार 8 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में देश के चयनित नवाचारों के संबंध में प्राइम मिनिस्टर रूरल डेव्हलमेंट फैलोज से वार्ता आयोजित की गई। वार्ता के दौरान पूरे देश के सर्वश्रेष्ठ 24 प्रयासों की सफलता की कहानी की पत्रिका का विमोचन किया गया।

पत्रिका के आधार पर सर्वश्रेष्ठ 10 प्रयास की प्रस्तुति प्रधानमंत्री के सामने की गई। इसमें मध्य प्रदेश का एकमात्र प्रदर्शन मण्डला जिले के ज्ञानार्जन प्रोजेक्ट का था। ज्ञानार्जन पूरे मध्य प्रदेश में ऐसा सॉफ्टवेयर बन गया है जिसका प्रदर्शन प्रधानमंत्री रूरल डेव्हलपमेंट फैलोज की राष्ट्रीय वार्ता में शामिल कर प्रदर्शित किया गया। इस प्रोजेक्ट को पीएमआरडी नेहा गुप्ता ने प्रदर्शित किया।

प्रस्तुति के दौरान बताया गया कि मण्डला जिला भारत के 20 सबसे कम विकसित जिलों में है। दूरस्थ अंचलों के स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति, समय पर पाठ्यक्रम पूर्ण नहीं होने और शालाओं में विद्यार्थियों की कम उपस्थिति जैसी समस्याएँ आती रहती हैं।

कलेक्टर लोकेश जाटव के नेतृत्व में पीएमआरडीएफ, आदिवासी विकास विभाग, उत्साही शिक्षकों एवं मेधावी छात्रों की भागीदारी से ज्ञानार्जन प्रोजेक्ट शुरू किया गया। प्रोजेक्ट का मूल उद्देश्य जिले के सभी 167 शासकीय हाई एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में बेहतर शिक्षा को सुनिश्चित करना है।

प्रोजेक्ट के जरिये जीपीएस आधारित टेबलेट एवं वेब एप्लीकेशन से नियमित पर्यवेक्षण पद्धति की पहल की गई। इसमें शिक्षकों की ई डायरी, ई अटेन्डेंस और अवकाश संबंधी आवेदन सहित शिक्षकों के अन्य स्वत्वों के निराकरण की व्यवस्थाएँ प्रारम्भ की गई। पहली बार शालाओं में कॉल सेंटर के माध्यम से अभिभावकों से सुझाव लेकर प्रोजेक्ट में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की गई।

बच्चों के प्रतिस्पर्धात्मक शैक्षणिक परिवेश में वृद्धि के लिये आधुनिक ग्रंथालय, प्रयोगशालाएँ, स्मार्ट क्लासेस प्रारम्भ करने के साथ शिक्षकों द्वारा गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे कठिन विषयों पर अन्य विषय की अपेक्षा ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

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