नहीं देना होगा स्टॉम्प पेपर पर शपथ-पत्र

भोपाल, सितम्बर  2014/ राज्य सरकार के एक फैसले से प्रदेश के नागरिकों, खासतौर पर छात्र-छात्राओं को एक बड़ी सहूलियत मिल गई है। स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र हासिल करने एवं सरकार की विभिन्न योजना का लाभ उठाने के लिये उन्हें अब यहाँ-वहाँ भटकने और नोटरी से एफिडेविट करवाने की जरूरत नहीं रहेगी। आम जनता को शैक्षणिक संस्थाओं में दाखिला एवं छात्रवृत्ति तथा स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र जारी करने के लिये राज्य सरकार ने प्रक्रिया का सरलीकरण कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुशासन दिवस पर सुशासन भवन के लोकार्पण समारोह में यह घोषणा की थी। घोषणा के अनुरूप सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आज 26 सितम्बर को इस संबंध में आदेश जारी कर दिये गये हैं।

राज्य शासन द्वारा जारी किये आदेश के अनुसार अब स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र के लिये संबंधित व्यक्ति द्वारा सादे कागज पर हस्तलिखित या टाइप किये आवेदन पर स्व-हस्ताक्षरित और स्व-प्रमाणित घोषणा-पत्र के आधार पर उसे मध्यप्रदेश का स्थानीय निवासी माना जायेगा। इसके लिये वह व्यक्ति पात्र होगा, जो निम्न में से किसी एक मापदंड की पूर्ति करेगा –

आवेदक मध्यप्रदेश में पैदा हुआ हो या मध्यप्रदेश में कम से कम 10 वर्ष से निवासरत हो।

राज्य शासन एवं उसके द्वारा स्थापित संस्था/निगम/मंडल/आयोग में सेवारत या सेवानिवृत्त कर्मचारी हो।

राज्य शासन के अधीन मध्यप्रदेश की भौगोलिक सीमा से बाहर स्थापित कार्यालयों में नियोजित कर्मचारी के लिये यह जरूरी होगा कि वह मध्यप्रदेश में पैदा हुआ अथवा कम से कम 10 वर्ष तक प्रदेश में निवासरत हो।

आवेदक अखिल भारतीय सेवाओं के लिये मध्यप्रदेश राज्य का आवंटित अधिकारी हो।

राष्ट्रपति/राज्यपाल महोदय द्वारा संवैधानिक अथवा विधिक पद पर नियुक्त हो।

भूतपूर्व सैनिक जिन्होंने मध्यप्रदेश में 5 वर्ष तक निवास किया हो या उसके परिजन मध्यप्रदेश में पहले से ही निवासरत हों, उन्हें पात्रता होगी। इसकी पुष्टि सैनिक कल्याण संचालनालय के प्रमाण-पत्र के आधार पर की जायेगी।

राज्य सरकार के नये आदेश के अनुसार अब शपथ-पत्र के स्थान पर स्व-प्रमाणित घोषणा-पत्र मान्य होगा। राज्य शासन द्वारा संचालित विभिन्न लोक सेवा जैसे सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बीपीएल राशन कार्ड, रोजगार कार्यालय में पंजीयन, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, छात्रवृत्ति, विद्युत कनेक्शन, निर्माण श्रमिकों का पंजीयन आदि सेवाओं में हितग्राही को आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज और शपथ-पत्र तैयार कर संलग्न करना होता था। नवीन व्यवस्था में अब आवेदक को शपथ-पत्र के स्थान पर स्वयं के द्वारा प्रमाणित घोषणा-पत्र आवेदन के साथ देना होगा। इसके लिये किसी प्रकार के स्टॉम्प पेपर खरीदने अथवा नोटराइज्ड करवाने की जरूरत नहीं होगी।

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