निःशक्त विद्यार्थियों के लिए कम्प्यूटर लेब

भोपाल, मार्च 2013/ प्रदेश में शैक्षणिक गुणवत्ता की दृष्टि से अनूपपुर, मंडला, बैतूल और झाबुआ जैसे आदिवासी बहुल जिले प्रथम 10 जिलों में शामिल हैं। हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा करवाई गई रैंकिंग में यह ज्ञात हुआ है। प्रदेश के 5 जिलों भोपाल, इंदौर, जबलपुर, होशंगाबाद और ग्वालियर में निःशक्त विद्यार्थियों के लिए कम्प्यूटर लेब की स्थापना की जा रही है। इसके तहत उपकरण और साफ्टवेयर व्यवस्था कर ली गयी है और आवश्यक प्रशिक्षण शुरू किया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में प्रतिभा पर्व फॉलोअप के अंतर्गत विशेष शिक्षण कक्षाएँ भी लगाई जा रही हैं जिससे डी एवं ई ग्रेड बच्चों के उन्नयन में आसानी होगी। प्रति सप्ताह बच्चों के ग्रेड उन्नयन की समीक्षा की जा रही है। यह जानकारी यहाँ मध्यप्रदेश सर्व शिक्षा अभियान मिशन की कार्यकारिणी समिति की बैठक में दी गई। मुख्य सचिव आर. परशुराम ने बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक में मुख्य सचिव परशुराम ने शैक्षणिक गुणवत्ता की दृष्टि से आखिरी 50 विकासखण्ड में प्रयास बढ़ाने के निर्देश दिए। विकलांग बच्चों के लिए शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। कहा कि विद्यालयों में शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित पद्धतियों का प्रयोग प्रारंभ किया जाए। इससे प्रदेश के शैक्षणिक परिदृश्य को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि विद्यार्थियों की शाला त्यागने की प्रवृत्ति में सुधार के प्रयास भी किये जाये। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक उन्नयन के लिए मीना रेडियो को सामुदायिक रेडियो से जोड़ने पर ध्यान दिया जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के तीन जिलों अलीराजपुर, झाबुआ और डिंडोरी जिलों के 19 विकास खण्ड में बेहतर शिक्षा व्यवस्थाओं के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं और इसके लिए नियमित बैठकें कर समीक्षा भी की जा रही है। निर्देश दिए कि प्रदेश के बड़े नगरों के झुग्गी क्षेत्रों के सभी बच्चों को शिक्षा का लाभ दिलवाने के लिए कार्य-योजना पर अमल किया जाए। बैठक में सर्व शिक्षा अभियान की वर्ष 2013-14 की वार्षिक कार्य-योजना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई ।

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