पर्यावरण को लील रहा बाजारवाद

भोपाल: भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा समाहित है। वर्तमान समय में बाजारवाद और उपभोक्तावादी संस्कृति ने पर्यावरण को सर्वाधिक हानि पहुँचाई है।

पर्यावरण संरक्षण के लिये शिक्षकों को जागरूक करने के इरादे से भोपाल में हुई दो दिन की वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने यह बात कही। यह वर्कशॉप एप्को ने ‘राष्ट्रीय हरित कोर” योजना के तहत आयोजित की। एप्को प्रदेश में इस योजना की नोडल एजेंसी है। इसमें प्रदेश के 50 जिलों के लगभग 200 मास्टर्स ट्रेनर शामिल हुए।

मुख्य अतिथि राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान भोपाल के संचालक विजय अग्रवाल ने कहा कि पर्यावरण जागरूकता के लिये शिक्षकों को रोल मॉडल की भूमिका निभानी चाहिये। लोगों को यह बताना जरूरी है कि जितनी जरूरत हो प्राकृतिक संसाधनों का उतना ही उपयोग करें। जैव विविधता बोर्ड के कोऑर्डिनेटर डी.पी. तिवारी ने कहा कि बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने के लिये पर्यावरण संरक्षण को अनौपचारिक शिक्षा में शामिल किया जाए। 

एप्को के संचालक प्रशिक्षण अम्बरीश श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा ही बच्चों में पर्यावरण जागरूकता पैदा कर सकती है। एप्को के पूर्व संचालक उदय राज सिंह ने कहा कि शिक्षक प्रदर्शन मॉडल तैयार कर बच्चों में पर्यावरण जागरूकता लाएं। पर्यावरण के लिये कानून बनाने से ज्यादा उसका पालन एवं प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। कार्यशाला मेंे श्री शरद जैन संचालक योजना एप्को, डॉ. उपेन्द्रमणि शुक्ला वरिष्ठ शोध अधिकारी एप्को एवं प्रभारी हरित कोर ने भी विचार रखे। शोध अधिकारी डॉ. आर.के. जैन ने आभार व्यक्त  किया।

‘हरित कोर” योजना में प्रदेश के सभी जिलों में 250 ईको क्लब गठित किये गये हैं। प्रत्येक जिले से दो-दो मास्टर्स ट्रेनर्स का चयन किया गया है। इन मास्टर्स ट्रेनर्स के लिये यह वर्कशॉप  की गई।

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