प्रकृति को आदर देने का संस्कार दें: शिवराज

भोपाल, नवम्बर 2015/ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पर्यावरण में असंतुलन की स्थिति के लिये मनुष्य की लोभी गतिविधियाँ जिम्मेदार हैं। पर्यावरण संतुलन और सुरक्षा के लिये समाज को भी सोचना होगा और इससे जुड़ना होगा। प्रकृति को आदर देने के संस्कार को पुन: जीवन देना होगा। श्री चौहान यहाँ दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘वैश्विक तपन और जलवायु परिवर्तन- समाधान की ओर’ के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।

मुख्य अतिथि आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर जी ने कहा कि पृथ्वी की रक्षा के लिये पर्यावरणीय प्रदूषण, अन्याय और अशुचिता के खिलाफ असहिष्णुता होना जरूरी है। असहिष्णुता का प्रदर्शन सही जगह होना चाहिये।

सिंहस्थ 2016 के परिप्रेक्ष्य में आयोजित विचार श्रंखला में इस संगोष्ठी का आयोजन नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा पर्यावरण नियोजन एवं समन्वयक संगठन, नर्मदा समग्र, जन अभियान परिषद और सेकाईडेकान संस्था के सहयोग से किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तपन जैसी समस्याओं के संबंध में भारत में पहले से जाग्रति है। भारत में प्रकृति को पूजने की परंपरा है। नदियों को माता के समान आदर देने की परंपरा है। पेड़-पौधों, प्राणियों को आदर भाव से देखने का संस्कार है। सिर्फ पर्यावरण के प्रति व्यवहार और नजरिया बदलना है।

श्री चौहान ने कहा कि सिंहस्थ 2016 के परिप्रेक्ष्य में आयोजित विचार श्रंखला में इस राष्ट्रीय सम्मेलन में जो निष्कर्ष निकलेगा उसे 12,13 और 14 मई 2016 में उज्जैन सिंहस्थ के समय ”सिंहस्थ घोषणा” के नाम से जारी किया जायेगा। यह भारत की ओर से पूरी दुनिया के लिये संदेश होगा।

श्री रविशंकर ने कहा कि पानी और प्रेम को खरीदा नहीं जा सकता। पानी को प्रेम की दृष्टि से देखना जरूरी है। दृष्टिकोण बदलने से व्यवहार बदल जाता है। भारत ने हमेशा से पर्यावरण की चिंता की है। हाल के वर्षों में मनुष्य ने पशुओं जैसा व्यवहार करना सीख लिया है। व्यवहार बदलना होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मंथन से ही मंगल होगा।

श्री गुरूजी ने कहा कि मानव स्वभाव के कारण पर्यावरण का संतुलन बिगड़ गया है। सिर्फ पर्यावरण की सुरक्षा काफी नहीं पर्यावरण की आराधना जरूरी है। पर्यावरण की पूजा करना भारत की परंपरा में है। जब तक पर्यावरण की हानि के प्रति जन आक्रोश उत्पन्न नहीं होगा पर्यावरण की रक्षा नहीं होगी। इसके लिये प्रशिक्षण भी जरूरी है। सबको मिलकर शंखनाद करना होगा।

श्री रविशंकर ने आयोजन के लिये मध्यप्रदेश सरकार की सराहना करते हुए कहा कि इससे पृथ्वी बचाने का संदेश जायेगा। पृथ्वी में रक्त की अल्पता हो गई है। उन्होंने अपेक्षा की कि पूरे मध्यप्रदेश में रसायन मुक्त खेती होना चाहिये प्रदेश पूरी तरह से जैविक प्रदेश बने।

राज्य मंत्री नगरीय प्रशासन लाल सिंह आर्य ने कहा कि पृथ्वी बचाने के लिये सामूहिक प्रयास जरूरी है। राज्य सभा सदस्य अनिल माधव दवे ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिये पाँच तत्वों के प्रति संवेदनशील होकर उनकी रक्षा के लिये कदम बढ़ाना होगा।

इस अवसर पर आचार्य लोकेश, विधान सभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा, मुख्य सचिव अंटोनी डि सा उपस्थित थे। देश-विदेश से आये पर्यावरणविद और विषय-विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिये। प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं पर्यावरण मलय श्रीवास्तव ने आभार माना।

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