प्रदेश की 35 हजार 500 करोड़ की वार्षिक योजना मंजूर

नई दिल्‍ली, मई 2013/ मध्यप्रदेश के लिये वर्ष 2013-14 का वार्षिक योजना परिव्यय 35 हजार 500 करोड़ मंजूर हुआ है। यह गत वर्ष की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक है। वार्षिक योजना को नई दिल्ली में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोन्टेक सिंह अहलूवालिया से बातचीत के बाद अंतिम रूप दिया गया। इस अवसर पर योजना एवं वित्त मंत्री राघवजी और राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष बाबूलाल जैन भी उपस्थित थे।

बैठक में श्री अहलूवालिया ने कहा कि विकास के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने बहुत अच्छा काम किया है और योजना राशि का व्यय भी काफी संतोषजनक है। उन्होंने विशेषकर जन-निजी भागीदारी (पीपीपी) की प्रशंसा की। इस बात का विशेष उल्लेख किया कि प्रदेश में पीपीपी मोड में 50 से अधिक परियोजनाएँ शुरू की गई हैं। 11वीं पंचवर्षीय योजना में मध्यप्रदेश की औसत सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 9.4 प्रतिशत रही है जो काफी उत्साहजनक और सकारात्मक है। कृषि के क्षेत्र में पंचवर्षीय योजना के दौरान 6.9 प्रतिशत, उद्योग क्षेत्र में 9.6 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में 10.6 प्रतिशत वृद्धि हुई जो 11वीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य और अखिल भारतीय औसत से अधिक है।

मुख्यमंत्री ने कोल ब्लॉक्स तथा कोल लिंकेजों के पर्याप्त आवंटन के साथ ही विद्युत परियोजनाओं के लिये वन संबंधी स्वीकृतियाँ दिलवाने में योजना आयोग से सहयोग मांगा। सर्व शिक्षा अभियान में वर्तमान फंडिंग व्यवस्था जारी रखने और अधोसंरचना संबंधी परियोजनाओं के लिये वायेबिलिटी गेप फंड की केन्द्रीय सहायता बढ़ाने की अपेक्षा की।

योजना के मुख्य बिन्दु

वर्ष 2013-14 की वार्षिक योजना में सामाजिक सेवा क्षेत्र के लिये 40 प्रतिशत, पर्यटन और सड़क निर्माण के लिये 11 प्रतिशत, ऊर्जा के लिये 10 प्रतिशत, कृषि से जुड़ी गतिविधियों के लिये लगभग 10 प्रतिशत और शेष क्षेत्रों के लिये 18 प्रतिशत का प्रावधान किया गया है। इसी तरह पिछले वित्त की तुलना में वर्ष 2013-14 के लिये सहकारिता विभाग के बजट में लगभग 55 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति कल्याण के लिये 47.4 प्रतिशत, अनुसूचित जाति कल्याण के लिये 44.6 प्रतिशत और पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिये 41.2 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है। इसी प्रकार वन विभाग के बजट में 44.4 प्रतिशत, उद्योग विभाग के लिये 33.9 प्रतिशत और जल और सेनीटेशन के लिये 30.9 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है।

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