प्रदेश के 11 स्‍थानों पर उद्यानिकी को बढ़ावा

भोपाल, सितम्बर 2014/ मध्यप्रदेश में खेती को लाभ का धंधा बनाने के प्रयासों में उद्यानिकी को भरपूर बढ़ावा दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश में सिर्फ फूड पार्क में ही खाद्य प्र-संस्करण को प्रोत्साहित नहीं किया जा रहा बल्कि किसानों द्वारा अपने खेत में खाद्य प्र-संस्करण का काम किये जाने पर भी उन्हें उद्योग का पूरा लाभ दिया जा रहा है।

मध्यप्रदेश के एग्री 11 क्लाइमेटिक जोन में वैज्ञानिक अध्ययन करवाकर उपयुक्त उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने की पहल की गई है। अभूतपूर्व कृषि विकास में उद्यानिकी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नया, छोटा और कम अमले वाला विभाग होने के बावजूद उद्यानिकी क्षेत्र में बेहतर कार्य किया जा रहा है। भारत सरकार की उद्यानिकी विकास योजनाओं का पूरा-पूरा लाभ लेने के प्रयास किये जा रहे हैं।

राज्य शासन ने वर्ष 2010 में विधानसभा में पारित संकल्प के अनुसरण में पिछले चार साल में 5 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त क्षेत्र को उद्यानिकी के अंतर्गत लाने में सफलता पाई है। वर्ष 2003 में प्रदेश में मात्र 4 लाख 68 हजार और वर्ष 2004-05 में 5 लाख 17 हजार हेक्टेयर में उद्यानिकी की फसलें ली जाती थीं। अब 14 लाख 66 हजार हेक्टेयर में यह कार्य हो रहा है।

उद्यानिकी विकास संबंधी योजनाओं में अनुदान की राशि सीधे हितग्राही किसान के बेंक खाते में जमा करवाने की व्यवस्था की गई है। साथ ही किसानों को अपनी मर्जी से कृषि उपकरण खरीदने की छूट दी गई है। इतना ही नहीं प्रदेश में संरक्षित खेती को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। फलस्वरूप किसान एक लाख रुपये प्रति एकड़ तक कमा रहे हैं।

प्रदेश में उद्यानिकी संबंधी गतिविधियों के विस्तार के फलस्वरूप अच्छे किस्म और कम ग्लूकोज के आलू का उत्पादन करने वाले क्षेत्र महू और इन्दौर के किसान स्वयं आलू चिप्स बनाकर पूरे देश में उसकी आपूर्ति कर रहे हैं। मालवा में जल-स्तर तेजी से नीचे जाने के कारण वहाँ टपक सिंचाई योजनाओं का ज्यादा विस्तार किया गया है। छोटे कोल्ड स्टोरेज की स्थापना की जा रही है। कोल्ड चेन बनाने में पीपीपी मोड को अपनाया गया।

इस प्रकार 2000 मीट्रिक टन क्षमता के छोटे कोल्ड स्टोरेज के निर्माण की योजना में हितग्राहियों को राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन के मापदण्ड के अनुसार परियोजना लागत का 50 प्रतिशत अनुदान 3000 रुपये प्रति मीट्रिक टन के मान से अधिकतम 2000 मीट्रिक टन तक राशि 60 लाख रुपये अनुदान स्वरूप दिया जा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य प्र-संस्करण मिशन योजना में 75 प्रतिशत केन्द्रांश और 25 प्रतिशत राज्यांश उपलब्ध करवाया जा रहा है। योजना में गत वर्ष 2013-14 में 1247 लाख रुपये के अनुदान वितरित किये गये। जिन गतिविधियों के लिये अनुदान राशि दी गई, उनमें टेक्नालॉजी अपग्रेडेशन स्टेब्लिशमेंट/मॉर्डनाईजेशन ऑफ फूड प्रोसेसिंग इण्डस्ट्रीज, गैर उद्यानिकी फसलों के लिये कोल्ड चेन, वेल्यू एडीशन एवं प्रिजर्वेशन इन्फ्रा-स्ट्रक्चर, मानव संसाधन विकास, डिग्री-डिप्लोमा सर्टिफिकेट कोर्स इन फूड प्रोसेसिंग, टेक्नालॉजी के इन्फ्रा-स्ट्रक्चर का सृजन, इंटरप्रेन्योरशिप डेव्हलपमेंट प्रोग्राम (ईडीपी), फूड प्रोसेसिंग ट्रेनिंग सेंटर (एफपीटीसी), प्रमोशनल एक्टीविटीज, सेमीनार/वर्कशॉप तथा स्टडी सर्वे आदि शामिल हैं।

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