प्रदेश में प्रमाणित जेनेरिक दवाइयों की ही खरीदी

भोपाल, सितम्बर 2014/ प्रदेश में जिला चिकित्सालय में सामान्य रोगियों के साथ ही अब केंसर रोगियों को भी उनके उपचार में आवश्यक जेनेरिक दवाइयाँ नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जायेंगी। प्रथम चरण में प्रदेश के 25 जिलों में इसका क्रियान्वयन होगा। केंसर रोगियों के लिए कीमोथेरेपी की व्यवस्था भी और बेहतर बनाई जायेगी। प्रदेश के जिला अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा भी शुरू की जा चुकी है। अभी 8 जिले में इस सुविधा का लाभ रोगियों को मिल रहा है।

जेनेरिक औषधियों के नि:शुल्क वितरण की सरदार वल्लभभाई पटेल योजना का लाभ रोजाना 4 से 5 लाख रोगी को दिलवाया जा रहा है। रोगियों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ भी मिल रही हैं जिनमें रोगों की जाँच, भोजन और परिवहन सुविधा शामिल है।

दवाइयों की शासकीय उपार्जन प्रक्रिया संबंधी महालेखाकार ग्वालियर के प्रतिवेदन के जिन मुद्दों को उठाया जा रहा है, वह चार वर्ष पुराना है। प्रतिवेदन पर विभाग द्वारा पहले से ही आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।

वस्तु-स्थिति यह है कि विश्व के लगभग 60 प्रतिशत देश जेनेरिक औषधियों का ही उपयोग करते हैं। राज्य में जेनेरिक औषधियों के क्रय से लगभग 1000 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। जेनेरिक दवाइयाँ गुणवत्ता प्रभाव में रासायनिक रूप, शुद्धता, मात्रा, सुरक्षा और ताकत में ब्रॉण्‍डेड दवा के समान ही होती है। स्वाभाविक तौर पर जिन कम्पनियों के हित प्रभावित हो रहे हैं वे पुराने प्रकरणों से भ्रम फैला रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा ई-टेन्डरिंग के माध्यम से डब्ल्यू एच.ओ.- जी.एम.पी. प्रमाणित निर्माताओं से ही जेनेरिक औषधियाँ क्रय की जा रही हैं। प्रदेश में दवा नीति 2009 लागू है। देश की सर्वश्रेष्ठ संस्था टी.एन.एम.एस.सी. के माध्यम से वर्ष 2010-11 और 2011-12 में औषधि उपार्जन का कार्य किया गया। जो जेनेरिक औषधियाँ 45 हजार रुपये मूल्य की हैं, वही ब्राण्डेड औषधियाँ कई गुना ज्यादा कीमत पर 5 से 10 लाख के मध्य आती है।

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