बच्‍चों में स्कूल से ही विकसित हो वैज्ञानिक दृष्टिकोण

भोपाल, मई 2013/ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष और लब्ध प्रतिष्ठित अंतरिक्ष वैज्ञानिक पद्मभूषण डॉ. जी. माधवन नायर ने कहा है कि बच्चों में स्कूल स्तर से ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास किया जाना चाहिए। उन्हें हर चीज को वैज्ञानिक दृष्टि से देखने की प्रेरणा मिलनी चाहिए। डॉ. नायर यहाँ भेल दशहरा मैदान में द्वितीय भोपाल विज्ञान मेले का शुभारंभ कर रहे थे।

कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने घोषणा की कि डॉ. नायर की वैज्ञानिक प्रतिभा का मध्यप्रदेश के विकास में उपयोग करने के लिये उनकी अध्यक्षता में एक वैज्ञानिक सलाहकार मण्डल बनाया जायेगा।

डॉ. नायर ने जीवन में पहली बार हिन्दी में अपना भाषण देते हुए कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही विज्ञान की उत्कृष्ट परम्परा रही है। पाँच हजार वर्ष पूर्व लिखित वैदिक साहित्य में भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों का विस्तार से वर्णन है। उनके चिंतन ने इतनी ऊँचाइयों को छुआ कि जीवन का कोई विषय इससे अछूता नहीं रहा। बीसवीं सदी में भारत के विज्ञान ने फिर से नई अंगड़ाई ली और मेघनाद साहा, सी.वी. रमन, जे.सी. बोस, होमी भाभा, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे वैज्ञानिक हमारे यहां हुए।

श्री नायर ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से भेंट करने के बाद उन्हें मध्यप्रदेश के विकास की प्राथमिकताओं के बारे में जानने को मिला। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के कार्य काफी सराहनीय हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने श्री नायर में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर बहुत गहरी ललक है। उनकी सोच और वैज्ञानिक प्रतिभा का लाभ लेने के लिये उनकी अध्यक्षता में मध्यप्रदेश में वैज्ञानिक सलाहकार मण्डल गठित किया जायेगा। श्री नायर चाहते हैं कि प्रदेश में सबसे पहले 50 गाँव को गोद लेकर उन्हें आदर्श स्वरूप दिया जाये। ये गाँव विज्ञान के साथ विकास का उदाहरण पेश करें।

मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. अखिलेश पाण्डे, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के अध्यक्ष डॉ. एन.पी. शुक्ला और मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के महानिदेशक प्रो. प्रमोद कुमार वर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

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