बदल रही है प्रदेश के शहरों की सूरत

भोपाल। मध्‍यप्रदेश में चल रही विभिन्‍न योजनाओं के कारण शहरों की सूरत बदल रही है। सरकार द्वारा शहरों के सुनियोजित विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शहरों के व्यवस्थित विकास के लिए वर्ष 2013 तक प्रदेश के सभी शहरों की नगर विकास योजना तैयार की जाएगी। अब तक 377 शहरों में से 110 शहरों के विकास की योजना तैयार कर ली गई है। इंदौर तथा भोपाल महानगरों में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने दिल्ली मेट्रो कारर्पोशन द्वारा मेट्रो रेल का सर्वेक्षण करवाया गया है। खजुराहो एवं महेश्वर-मंडलेश्वर में विशेष क्षेत्र प्राधिकरण तथा अमरकंटक, कटनी, सिंगरौली और रतलाम में विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई है। राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के अंतर्गत नर्मदा – होशंगाबाद, बीहर नदी-रीवा, मंदाकिनी नदी-चित्रकूट तथा राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना में सागर एवं शिवपुरी के तालाब के संरक्षण एवं उन्नयन का कार्य किया जा रहा है।

जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (जे.एन.यू.आर.एम.) के अन्तर्गत प्रदेश के चार प्रमुख शहर- भोपाल, इंदौर, उज्जैन एवं जबलपुर की 49 परियोजना के लिए भारत सरकार से 3347 करोड़ 82 लाख की राशि की स्वीकृति प्राप्त कर ली गयी है। मिशन में चयनित शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए 193 करोड़ 70 लाख की राशि 525 लो फ्लोर बस को खरीदने के लिए मंजूर की गयी है।

22 हजार से ज्यादा आवास का निर्माण

एकीकृत आवास एवं मलिन बस्ती विकास कार्यक्रम में शहरी गंदी बस्तियों के विकास के लिए 362 करोड़ 4 लाख की लागत की 53 परियोजनाएँ मंजूर की गयी हैं। इन परियोजनाओं के जरिये गरीबों के लिए 22 हजार 510 आवास का निर्माण एवं अधोसंरचना विकास के कार्य किए जा रहे हैं। राजीव आवास योजना के प्रथम चरण में प्रदेश के छ: नगर भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर एवं सागर को स्लम फ्री नगर बनाए जाने के लिए भारत सरकार द्वारा चयन किया गया है। छोटे एवं मझोले नगरों में अधोसंरचनाओं के विकास के लिए यू.एन.डी.एस.एस.एम.टी. योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना में 42 नगर की 56 परियोजना के लिए 1076 करोड़ 54 लाख की स्वीकृति प्रदान की गयी है।

राज्य शासन ने प्रदेश के भोपाल एवं इंदौर शहर में स्तरीय लोक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध करवाने के लिए प्री-फीजिबिलिटी सर्वे करवाया है। इसके आधार पर इन शहरों में मेट्रो रेल की डी.पी.आर.तैयार करवाने के लिए ग्लोबल टेण्डर जारी किए जाने की कार्यवाही प्रचलित है।

राज्य शासन ने पहली बार मुख्यमंत्री के नाम से शहरों में पेयजल, अधोसंरचना विकास एवं परिवहन आदि सुविधाओं के लिए विस्तार की योजनाएँ बनायी हैं। शहरों में मूलभूत सुविधाओं के विकास एवं विस्तार के लिए मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना, मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना एवं मुख्यमंत्री नगरीय स्वच्छता कार्यक्रम बनाया है। इसके साथ ही नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए कार्ययोजना बनायी है।

मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना

मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना के माध्यम से नगरीय क्षेत्र के ‘हर घर में नल तथा हर नल में जल’ की अवधारणा को मूर्तरूप दिया जाएगा। इसके लिए पचास हजार से अधिक जनसंख्या वाले नगरीय निकाय को योजना लागत की 30 प्रतिशत तथा पचास हजार से कम जनसंख्या के नगरीय निकाय को 20 प्रतिशत राशि राज्य शासन के अनुदान के रूप में उपलब्ध करवाएगी। इसके लिए इस वित्तीय वर्ष में 157 करोड़ 25 लाख की राशि का बजट प्रावधान किया गया है। प्रथम चरण में 132 करोड़ रुपये की राशि से 37 शहरों की योजनाएँ शुरू की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना

मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना के माध्यम से सभी नगरीय निकायों में अधोसंरचनाओं का विकास निर्धारित मानक के अनुरूप किया जाएगा। इसके लिए योजना लागत की 30 प्रतिशत राशि राज्य शासन द्वारा अनुदान के रूप में निकाय को उपलब्ध करवायी जाएगी। इस वर्ष योजना मद में सवा सौ करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री नगरीय स्वच्छता कार्यक्रम

प्रदेश के समस्त नगरीय परिवेश को पूर्णरूपेण स्वच्छ बनाने पर भी राज्य सरकार का ध्यान है। इसके लिये मुख्यमंत्री नगरीय स्वच्छता कार्यक्रम बनाया गया है। कार्यक्रम के अंतर्गत परिवार स्तर तथा सार्वजनिक स्थल पर स्वच्छ शौचालय की सुविधा, जल-मल के पूर्ण निपटान, वर्षा जल का शत-प्रतिशत प्रबंधन, नगरीय ठोस अपशिष्ट के पूर्ण निपटान की सुविधा जन-सामान्य की भागीदारी से की जाएगी।

नर्मदा जल के शुद्धिकरण के लिए 53 नगर में जल-मल निकासी, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, बरसाती जल की निकासी, स्वच्छता तथा वृक्षारोपण की कार्ययोजना तैयार की गयी है। कार्ययोजना के प्रथम चरण में 24 नगर में 5 अरब 78 करोड़ 29 लाख तथा द्वितीय चरण में 29 नगर में 7 अरब 20 करोड़ 58 लाख की राशि व्यय होना अनुमानित है। योजना के प्रथम चरण में 24 नगरीय निकाय – अमरकंटक, डिण्डोरी, शहपुरा (डिण्डोरी), मण्डला, बरेला, पनागर, भेड़ाघाट, जबलपुर, करेली, सांईखेड़ा, होशंगाबाद, शाहगंज, बुदनी, रेहटी, नसरूल्लागंज, बड़वाह, सनावद, मण्डलेश्वर, कसरावद, ओंकारेश्वर, धामनोद, अंजड़ एवं बड़वानी में नर्मदा जल के शुद्धिकरण का कार्य किया जाएगा।

नर्मदा शुद्धिकरण योजना के द्वितीय चरण में 29 नगरीय निकाय – जैतहरी, अनूपपुर, बिछिया, निवास, बम्हनी बंजर, नैनपुर, शहपुरा (जबलपुर), पाटन, गोटेगाँव, गाडरवारा, मोहगाँव (छिंदवाड़ा), बरेली, बाड़ी, औबेदुल्लागंज, पिपरिया, सोहागपुर, बाबई, इटारसी, सिवनी-मालवा, टिमरनी, हरदा, खिरकिया, खातेगाँव, कन्नौद, माण्डव, कुक्षी, मनावर एवं राजपुर में नर्मदा जल के शुद्धिकरण का कार्य होगा।

प्रदेश के दो नगर शिवपुरी एवं खण्डवा में निजी-जन-भागीदारी (पी.पी.पी.) से पेयजल की योजना का कार्य जारी है।

राम-रोटी योजना

शहरों में निवास करने वाले लोगों के कल्याण के लिए राज्य शासन ने नगरों में रैन बसेरों के निर्माण के साथ ही रैन बसेरा में ठहरने वाले लोगों के लिए “राम-रोटी योजना” भी प्रारंभ की है। यह योजना वर्तमान में भोपाल, इंदौर, जबलपुर एवं ग्वालियर शहर में लागू है। इस योजना में रैन बसेरा में रात्रि विश्राम करने वाले गरीब ग्रामीण लोगों को पाँच रुपये में एक समय का भोजन उपलब्ध हो रहा है। अब योजना को प्रदेश के अन्य शहरों में भी विस्तारित करने की योजना है।

मुख्यमंत्री साइकिल रिक्शा एवं हाथ ठेला चालक योजना

राज्य सरकार ने साइकिल रिक्शा एवं हाथ ठेला चालकों को किरायेदार से मालिक बनाने, उनके परिवार को चिकित्सा, सामाजिक सुरक्षा एवं शिक्षा की जरूरतों में सहायता देने के लिए मुख्यमंत्री हाथ ठेला एवं साइकिल रिक्शा चालक कल्याण योजना-2009 प्रारंभ की है। इस योजना में स्वर्ण जयंती शहरी स्व-रोजगार योजना मद से साइकिल रिक्शा की प्रति इकाई लागत दस हजार रुपये में से 2500 रुपये का केन्द्र सरकार एवं 3500 रुपये की अनुदान राशि राज्य सरकार उपलब्ध करवाती है। इसी प्रकार हाथ ठेला चालक को प्रति इकाई लागत के मान से केन्द्र एवं राज्य सरकार अनुदान मुहैया करवाती है। इस योजना में प्रदेश में सर्वेक्षित 14 हजार 29 साइकिल रिक्शा चालकों में से 4,568 हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा चुका है। प्रदेश के सर्वेक्षित 70 हजार 765 हाथ ठेला चालकों में से 25 हजार 833 हितग्राहियों को योजना का लाभ दिलाया जा चुका है।

मुख्यमंत्री शहरी घरेलू कामकाजी महिला कल्याण योजना

शहरी घरेलू कामकाजी बहनों के कल्याण के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री शहरी घरेलू कामकाजी महिला कल्याण योजना-2009 प्रारंभ की है। इस योजना में घरेलू कामकाजी बहनों का पंजीयन कर उनके परिवार की सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, चिकित्सा एवं कौशल उन्नयन संबंधी जरूरतों को पूरा किया जाएगा। योजना के अंतर्गत प्रदेश सभी 50 जिलों में स्थित नगरीय निकायों द्वारा घरेलू कामकाजी महिलाओं को परिचय-पत्रों का वितरण किया गया है। शहरी घरेलू कामकाजी महिलाओं को जनश्री बीमा योजना के तहत बीमित भी किया जा रहा है। इसके तहत उन्हें उपचार सुविधा तथा सामान्य मृत्यु पर 37 हजार 500 रुपये की बीमा राशि, दुर्घटनावश मृत होने पर 75 हजार रुपये, एक हाथ, एक पैर या एक आँख से विकलांग होने पर 37 हजार 500 रुपये की बीमा राशि दिये जाने का प्रावधान है। इसके अलावा उक्त महिलाओं को प्रसूति सहायता, प्रसूति अवकाश के दौरान उक्त अवधि में उनके द्वारा अर्जित राशि के बराबर की राशि, बीमित महिला को कक्षा 9 से 12 तक पढ़ने वाले बच्चों को 100 रुपये महीने की शिष्यवृत्ति दिये जाने की भी व्यवस्था मुख्यमंत्री घरेलू कामकाजी बहन (महिला) कल्याण योजना के तहत की गई है।

मुख्यमंत्री (पथ पर विक्रय करने वाले) शहरी गरीबों के लिए कल्याण योजना-2012

राज्य शासन द्वारा भारत सरकार के आवास एवं गरीबी उपशमन मंत्रालय द्वारा शहरी फेरीवालों के कल्याण के लिये बनाई नीति के अनुसरण में शहरों में गरीब तबके के ऐसे लोगों, जो फेरी लगाकर या सड़कों के फुटपाथ पर, गलियों के नुक्कड़ आदि पर अस्थायी स्टॉल लगाकर रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं का विक्रय कर अपना जीविकोपार्जन करते हैं, के कल्याण की योजना लागू की गई है। यह योजना मुख्यमंत्री (पथ पर विक्रय करने वाले) शहरी गरीबों के लिए कल्याण योजना-2012 है। योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश में शहरी फेरीवालों का सर्वेक्षण करवाया जा रहा है। सर्वेक्षण के बाद पहचान-पत्र जारी किए जाकर फेरीवालों के कल्याण की योजनाओं का लाभ उन तक पहुँचाना सुनिश्चित किया जायेगा।

कुल मिलाकर प्रदेश में शहरों के स्वरूप में बुनियादी बदलाव की कोशिशें राज्य सरकार ने आरंभ की हैं। इन कोशिशों के सार्थक परिणाम भी आने लगे हैं और भविष्य में भी नियोजित शहरों के रूप में सामने आयेंगे।

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