बाघों की सुरक्षा के लिए 600 कुत्तों को टीके

भोपाल, दिसम्बर 2015/ केनाइन डिस्टेम्पर और 7 अन्य जानलेवा बीमारी से जानवरों को बचाने के लिए पन्ना टाईगर रिजर्व द्वारा गत दो सप्ताह से परिधि से लगे हुए गाँवों में कुत्तों को टीके लगाये जा रहे हैं। ये जानलेवा बीमारियाँ कुत्तों के माध्यम से बाघ और अन्य जानवरों में फैलती हैं।

केनाइन डिस्टेम्पर जानवरों में तेजी से फैलने वाली बीमारी है जिसका अभी तक दुनिया में कोई माकूल इलाज नहीं है। इस बीमारी से संक्रमित जानवर के मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, श्वसन तंत्र, तन्त्रिका तंत्र आदि प्रभावित होकर गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल, आँख, तेज बुखार, डायरिया आदि बीमारियाँ हो जाती हैं। गत माह अमेरिका के इंडियाना में केनाइन डिस्टेम्पर से 6 बाघ और एक सिंह मृत्यु का शिकार हुए।

पन्ना पार्क प्रबंधन ने रिजर्व की सीमा से लगे हुए ग्राम अकोला, अमझिरिया, बाँधी, बराछ, झलाई, जरधोबा, इटवां, रमपुरा, तारा, डोभा, धनगढ़, जानवर, बटेरा, मनकी एवं कुटरिया के लगभग 1200 कुत्तों का टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक 600 कुत्तों को टीके लगाये जा चुके हैं।

ग्रामीणों से अपील की गयी है कि वे टीके लगाने में सहयोग करें। कई बार शिकार के बाद बाघ द्वारा छोड़े गए माँस को कुत्ते खाते हैं। इन कुत्तों के संक्रमित होने पर रेबीज, हेपेटाइटिस आदि बीमारियों का पार्क के जानवरों में फैलने का खतरा बना रहता है।

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