बालरंग में बच्चों ने समा बांधा

भोपाल, जनवरी 2015/ भोपाल में चल रहे राष्ट्रीय बालरंग में बच्चे अपने-अपने राज्य की पारम्परिक वेषभूषा, गीत और समूह नृत्य से इन्द्रधनुषी छटा बिखेरते नजर आये। समूचे भारत की कला एवं संस्कृति को समेटे बालरंग में बच्चों के प्रदर्शन ने छोटे-बड़ों सभी को आकर्षित किया। इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के प्रांगण में आयोजित बालरंग में मध्यप्रदेश सहित 22 राज्य के बच्चे भाग ले रहे हैं। अपर मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा एस.आर. मोहंती ने औपचारिक घोषणा और दीप जलाकर राष्ट्रीय बालरंग का शुभारंभ किया। इस मौके पर आयुक्त लोक शिक्षण डी.डी. अग्रवाल, आयुक्त राज्य शिक्षा केन्द्र रश्मि अरूण शमी, संग्रहालय के निदेशक एस.के. चौधरी आदि उपस्थित थे।

बच्चों को संबोधित करते हुए श्री मोहंती ने कहा कि जीवन में शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण भी जरूरी है। इसके लिये बालरंग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब तक चरित्र निर्माण नहीं होगा तब तक व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास संभव नहीं है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि बालरंग में भाग लेने वालों में बालिकाओं की संख्या अधिक है। उन्होंने बालिकाओं से कहा कि वे अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहे। किसी के बहकावे में न आकर स्वयं की बुद्धि एवं विवेक के बल पर आगे बढ़े। सदियों से कुरीतियों के कारण पिछड़ती रही बालिकाओं को अब आगे आकर अपनी भूमिका सिद्ध करना होगी। विद्यार्थी शिक्षा के अलावा सामाजिक मुद्दों के प्रति भी जागरूक रहे। स्वच्छता जैसे समाज-सेवा से जुड़े अभियान में योगदान करें। श्री मोहंती ने बालरंग पर आधारित स्मारिका और बाल पत्रकारों द्वारा प्रकाशित बाल पत्र का विमोचन किया।

श्री डी.डी. अग्रवाल ने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्ष 1996 से बालरंग की शुरूआत हुई है। वर्ष 2005 से इसे राष्ट्रीय बालरंग का दर्जा दिया गया। इस वर्ष राष्ट्रीय बालरंग का दसवां आयोजन है, जिसमें 22 राज्य के लगभग 500 बच्चे भाग ले रहे हैं। बालरंग में 7 विभिन्न विषय पर हुई राज्य-स्तरीय प्रतियोगिता में 919 विद्यार्थी ने भाग लिया। लघु भारत की थीम पर लगाई गई प्रदर्शनी में लगभग 3000 विद्यार्थी की भागीदारी रही। कार्यक्रम को श्री एस.के. चौधरी ने भी सम्बोधित किया।

समारोह के दूसरे चरण में विभिन्न राज्य के बीच सामूहिक लोक नृत्य प्रतियोगिता प्रारंभ हुई। पारम्परिक वेषभूषा में बच्चों ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किये। आयोजन स्थल पर स्काउट केम्प, जंगल केम्प, बाल-पत्र, बाल-न्यायालय, बाल-पुलिस, बाल-संसद आदि गतिविधियाँ की गई। विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई क्रॉफ्ट प्रदर्शनी भी आकर्षण का केन्द्र रही। लघु भारत प्रदर्शनी में राज्यों ने अपनी कला, संस्कृति और परम्परा का प्रस्तुतिकरण किया। गौरवशाली भारत थीम के अंतर्गत प्रदेशों की संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर पर आधारित प्रदर्शनी को लोगों ने बड़ी संख्या में देखा और सराहा।

राष्ट्रीय बालरंग का समापन रविवार 11 जनवरी को दोपहर 2 बजे होगा। पुलिस महानिदेशक सुरेन्द्र सिंह प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत करेंगे। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ रहे नृत्यों की प्रस्तुति भी होगी।

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