बाल रंग जैसे आयोजन देश की सांस्कृतिक धारा से जोड़ते हैं

भोपाल, दिसम्बर 2015/ बाल रंग में शामिल बच्चे देश की संस्कृति, लोक-कला, शिल्प एवं नैतिक जीवन-मूल्यों के प्रति जागृत होकर देश की धारा से जुड़ते हैं। उच्च एवं स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी ने यह बात राष्ट्रीय बाल रंग महोत्सव में कही। श्री जोशी ने हवा में गुब्बारे छोड़कर राष्ट्रीय बाल रंग का शुभारंभ किया। बाल रंग में 23 प्रदेश के बच्चे शामिल हो रहे हैं।

श्री जोशी ने कहा कि अनेकता में एकता के प्रतीक बाल रंग में सहभागिता से बच्चों के कोमल मन पर अमिट छाप पड़ती है। श्री जोशी ने बाल रंग स्मारिका-2015 और बाल-पत्र का विमोचन किया। उन्होंने लघु भारत प्रदर्शनी का शुभारंभ कर वहाँ लगे स्टॉल को देखा। बाल रंग में शामिल प्रदेशों की कला-संस्कृति स्टॉलों में प्रदर्शित की गयी है।

आयुक्त, लोक शिक्षण श्री डी.डी. अग्रवाल ने बताया कि बाल रंग की शुरूआत 1996 में की गयी थी। वर्ष 2006 से बाल रंग मानव संग्रहालय में किया जा रहा है। मानव संग्रहालय के संचालक प्रो. सरित चौधरी ने भी विचार व्यक्त किये। सरस्वती वंदना संस्कार वेली की छात्राओं ने प्रस्तुति की।

बाल रंग में हिमाचल, बिहार, जम्मू-कश्मीर, अरूणाचल, मेघालय, गुजरात, आसाम, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, नागलैण्ड, सिक्किम, आंध्रप्रदेश, उत्तराखण्ड, त्रिपुरा, दिल्ली, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, चण्डीगढ़, दादर और नगर-हवेली सहित अन्य राज्य के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये।

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