भक्तिरस से पूर्ण स्वर-लहरियों से गूँजा क्षिप्रा तट

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उज्जैन में सिंहस्थ महाकुम्भ की सांस्कृतिक अनुगूँज-3 की श्रंखला में दूसरे दिन बुधवार, 24 फरवरी को पावन सलिला मोक्ष-दायिनी माँ क्षिप्रा के तट पर सांस्कृतिक कार्यक्रम में जबलपुर की प्रसिद्ध लोक-भजन गायिका श्रीमती संजो बघेल की स्वर-लहरियों से क्षिप्रा तट गूँज उठा। श्रीमती बघेल ने भक्ति रस से परिपूर्ण भजन प्रस्तुत किये।अनुगूँज की शुरूआत श्रीमती बघेल की गणेश वंदना प्रस्तुति ‘घर में पधारो गजाननजी कि मेरे घर में पधारो” से हुई। उनके द्वारा माँ नर्मदा-क्षिप्रा का स्मरण करते हुए ‘हे माँ नर्मदा मैया तेरी हो जय-जयकार” भजन भी प्रस्तुत किया गया। उनकी तीसरी प्रस्तुति ‘बैठी उज्जैन में हरसिद्धि माँ द्वारे घंटा बजत है” भजन की दी गयी। क्षिप्रा तट पर उपस्थित श्रोताओं ने तालियों से श्रीमती बघेल का उत्साहवर्धन किया। श्रोताओं को श्रीमती बघेल द्वारा सिंहस्थ आमंत्रण पर आधारित भजनों के संग्रहण की सी.डी. नि:शुल्क वितरित की गयी। संचालन कला समीक्षक श्री विनय उपाध्याय ने किया। भजन संध्या का आनंद कला-प्रेमियों ने देर रात तक उठाया।

 

कालिदास अकादमी में दूसरे दिन भी सक्रिय रहे कलाकार

 

अनुगूँज-3 में दूसरे दिन उज्जैन की कालिदास अकादमी में चित्र, शिल्प से जुड़े कलाकार और साहित्यकार सक्रिय रहे। इन विधाओं के 87 कलाकार ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। चित्रकला में जन-जातीय, लोक-कला और सम-सामयिक विषयों का प्रदर्शन हुआ। शिल्प कला में मिट्टी, लकड़ी और लौह आदि के प्रयोग से कलाकारों ने कलात्मक वस्तुएँ बनायीं। श्रीमती आभा चौबे ने मूक-बघिर होने के बावजूद पूरी तन्मयता के साथ भगवान शंकर के चित्र बनाये। श्रीमती चौबे को तत्कालीन राष्ट्रपति मरहूम डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भी सम्मानित कर चुके हैं।

 

उमरिया जिले की 70 वर्षीय जोधईया बाई बैगा ने भोलेनाथ बाबा के चित्र बनाकर सबको अचंभित किया। वहीं उज्जैन के आस्ट्रीयोजेसिस अनुवांशिक बीमारी से ग्रस्त 19 वर्षीय सुगम सिंह ने धागों से मंदिर बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया।

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