मध्यप्रदेश में बना बालिकाओं के पक्ष में माहौल

भोपाल, जनवरी 2015/ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में पिछले 9 साल में मध्यप्रदेश में बालिकाओं के पक्ष में लागू योजनाओं और कार्यक्रमों के बेहतर परिणाम मिले हैं। साथ ही मध्यप्रदेश के महिला-बाल विकास कार्यक्रम और नवाचार पूरे देश में अनुकरणीय भी रहे।

बालिका का जन्म अभिशाप नहीं, सम्मान की बात है। इस मानसिकता को बनाने के लिये प्रदेश में सबसे पहली शुरूआत लाड़ली लक्ष्मी योजना के साथ हुई। इस एक योजना ने बेटियों को बोझ समझने की मानसिकता में बदलाव ला दिया। पूरे देश में यह एक ऐसी योजना है, जिसने बालिका के जन्म से लेकर उसके विवाह तक के दायित्व को निबाहा है। आज प्रदेश में साढ़े 18 लाख बालिका लाड़ली लक्ष्मी योजना से लाभान्वित हो रही हैं। इनसे जुड़े परिवारों में बालिका का होना आज सम्मान की बात है। यह संदेश प्रदेश के हर घर तक पहुँचा है कि बालिकाओं को अपनायें।

बालिकाओं के प्रति समाज में सम्मान का भाव पैदा हो, इसके लिये वर्ष 2011 में बेटी बचाओ अभियान शुरू किया गया। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में एक ऐसी मुहिम छेड़ी गई, जिसने समाज को यह सोचने पर मजबूर किया कि आखिर लड़के-लड़की में भेद कैसा। इस योजना को राष्ट्रीय स्वीकार्यता 22 जनवरी, 2015 को हरियाणा के पानीपत में मिली, जहाँ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय-स्तर पर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” योजना की शुरूआत की। यही नहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री श्री चौहान का नारा ‘बेटी नहीं बचाओगे, तो बहू कहाँ से लाओगे” को राष्ट्रीय नारा बनाया। प्रदेश में बेटी हर घर में, समाज में, मंच में, अस्पताल में, स्कूल में सम्मानित हो, इसके लिये वर्ष 2014 में स्वागतम लक्ष्मी योजना की शुरूआत की गई। प्रदेश में अब बालिका के जन्म लेते ही उसका स्वागत सार्वजनिक रूप से किया जाता है। स्कूल जाती है, वहाँ उसका स्वागत होता है। इसके पीछे एक ही मकसद है कि लोगों की सोच में बदलाव आये।

बालिका जन्म लेने के बाद शिक्षित, सक्षम और समर्थ हो, इसके लिये भी राज्य सरकार ने ठोस कदम उठाये हैं। बालिकाएँ पढ़-लिखकर अवसरों का लाभ उठायें, इसके लिये प्रदेश में 20 लाख से अधिक बालिका को स्कूल जाने के लिये सायकल दी गई। उन्हें नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तक और दो जोड़ी स्कूल ड्रेस दी गईं। बारहवीं कक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली बालिका को प्रतिमाह 500 रुपये की छात्रवृत्ति दी गई। वे उच्च अध्ययन के लिये प्रोत्साहित हों, इसके लिये प्रतिभा किरण योजना बनाई गई। आज प्रदेश की महिला साक्षरता 60 प्रतिशत हो गई है। बेटियों के विवाह में बाधा न आये, इसके लिये मुख्यमंत्री कन्यादान योजना लागू की गई। उन्हें राजनीतिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिये पंचायत एवं नगरीय निकाय में 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया। पुलिस की नौकरी में 30 प्रतिशत का आरक्षण देने के साथ हर परिवार में बालिकाओं का महत्व बढ़े, इसके लिये महिला प्रधान राशन-कार्ड बनाने की शुरूआत की गई। राशन की दुकानों के आवंटन में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया।

महिलाएँ हर स्थिति का मुकाबला कर सकें, इसके लिये शौर्या दलों का गठन कर उन्हें ताकत प्रदान की गई। राज्य सरकार के इन प्रयासों का ही सुफल है कि मध्यप्रदेश में लोगों की मानसिकता में कन्या के जन्म के प्रति बदलाव की शुरूआत हुई है।

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