मध्‍यप्रदेश ने देश में बदलाव की इबारत लिखी: जेटली

भोपाल, अप्रैल 2015/ केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने यहाँ एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश में बदलाव की अगर सबसे स्पष्ट कहानी लिखी गई है, तो वह मध्यप्रदेश में है। प्रदेश को शिवराज सिंह चौहान के रूप ऐसा नेतृत्व मिला है जिसका सबसे बड़ा गुण विश्वसनीयता है।

श्री जेटली ने कहा कि तीन बार लगातार चुनाव जीतना बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसके लिये कठोर परिश्रम करना पड़ता है। मध्यप्रदेश में 2003 में जब यह सरकार बनी थी तब विरोधी की कमजोरी और विफलता का इसमें ज्यादा योगदान था। लेकिन इसके बाद 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव श्री चौहान ने अपनी क्षमता से जीता। तीन बार लगातार चुनाव जीतने वाले राज्यों में एक समानता है कि वहाँ कृषि विकास दर 8 प्रतिशत से ज्यादा रही। इसी कारण वहाँ आर्थिक ताकत भी आई है। वर्ष 2003 से आज तक मध्यप्रदेश में बहुत व्यापक सामाजिक और आर्थिक बदलाव आये हैं।

श्री जेटली ने कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गाँधी के समय में दुनियाभर के अर्थशास्त्री भारत के विकास की चर्चा में कहते थे कि वहाँ हिन्दू रेट ऑफ ग्रोथ है, अर्थात वहाँ दो-ढाई प्रतिशत का विकास होगा, गरीबी होगी, अकाल होगा, सूखा होगा और बेरोजगारी रहेगी। लेकिन देश में अब ऐसा नहीं रहा। इसी तरह देश के भीतर जुमला बना कि देश आगे बढ़ सकता है, लेकिन बीमारू राज्यों की वजह से नहीं बढ़ पा रहा। इन बीमारू राज्यों में मध्यप्रदेश भी शामिल था। श्री चौहान के नेतृत्व में आज बीमारू में से ‘मा’ गायब हो गया है। मध्यप्रदेश आज रेवन्यू सरप्लस राज्य है।

केन्द्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि 12-13 साल पहले मध्यप्रदेश में बिजली कभी-कभी आती थी, वह भी दो-ढाई घंटे के लिये। सड़कों की खराब हालात के कारण एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र जाने में कठिनाई थी। पानी की तकलीफ थी। जब सत्ता परिवर्तन हुआ था तब यह डर था कि इन सब हालात को सुधारने की जिम्मेदारी किस तरह पूरी हो पायेगी। लेकिन हमने यह कर दिखाया है। अब यहाँ चौबीस घंटे बिजली है, सड़कों का जाल है और पानी की स्थिति भी बेहतर है। मध्यप्रदेश अब देश को अनाज देने वाला सबसे प्रमुख राज्य बन गया है। यहाँ 20 प्रतिशत कृषि विकास दर चौंकाने वाली है।

मुख्यमंत्री ने जमीन से अर्थ-व्यवस्था खड़ी की। गाँव में अधोसंरचना का विकास किया। बिजली पहुँचाई, पानी दिया, लोगों की जेब में ज्यादा पैसा गया। इससे वे बाजार में ज्यादा खर्च करते हैं जिससे व्यापार बढ़ रहा है। आगे चलकर और अच्छे शिक्षा संस्थान और स्वास्थ्य संस्थान खुलेंगे और लोगों के जीवन स्तर में सुधार आयेगा। मध्यप्रदेश ने विकेन्द्रीकृत मॉडल से विकास किया है।

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