मनरेगा में प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ कार्य

भोपाल, फरवरी 2015/ मनरेगा में उत्कृष्ट कार्यों के लिये मध्यप्रदेश को भारत सरकार द्वारा दसवें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को मंत्रि-परिषद की बैठक के अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने यह राष्ट्रीय अवार्ड सौंपा। इस मौके पर राज्य मंत्रि-परिषद के सदस्यों ने मनरेगा में मिली महत्वपूर्ण सफलता और पुरस्कार के लिये बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि मनरेगा में मध्यप्रदेश द्वारा देशभर में सर्वश्रेष्ठ कार्य किये गये हैं। मनरेगा कन्वर्जेंस के जरिये प्रदेश में स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण को सारे देश में सराहा गया है। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव अरुणा शर्मा तथा आयुक्त मनरेगा सीमा शर्मा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

विगत 2 फरवरी, 2015 को केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री वीरेन्द्र सिंह ने मनरेगा के दसवें सम्मेलन में नई दिल्ली में हुए समारोह में मध्यप्रदेश को मनरेगा में हुए सर्वश्रेष्ठ कार्यों के लिये राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा था। मध्यप्रदेश को वर्ष 2013-14 में मनरेगा और अन्य योजनाओं के साथ कन्वर्जेंस से ग्रामीण अंचलों में स्थाई आजीविका के अवसर उपलब्ध करवाने और स्थाई परिसंपत्तियों के निर्माण में किये गये उत्कृष्ट कार्यों के लिये यह पुरस्कार दिया गया। मनरेगा कन्वर्जैंस से स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है और देश का रोल मॉडल बनकर उभरा है। प्रदेश में मनरेगा से 74 फीसदी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ। प्रदेश में मनरेगा में कुल 1 करोड़ 2 लाख जॉब-कार्डधारी परिवार हैं। प्रदेश में कुल 179 करोड़ 11 लाख मानव दिवस सृजित हुए हैं। इसमें से अजा के 32 करोड़ 52 लाख, अजजा के 73 करोड़ 88 लाख और महिला श्रमिकों को 77 करोड़ 36 लाख मानव दिवस का रोजगार दिया जा चुका है।

मध्यप्रदेश में मनरेगा श्रमिकों को मजदूरी के त्वरित भुगतान तथा हिसाब-किताब में परदर्शिता के मकसद से अप्रैल 2013 से इलेक्ट्रॉनिक फंड मेनेजमेंट व्यवस्था (ई-एफएमएस) लागू की गयी। यह व्यवस्था लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। इस अनूठी व्यवस्था से मजदूरों को उनकी मांग पर रोजगार मुहैया करवाने के साथ उन्हें समय पर मजदूरी का भुगतान भी सुनिश्चित हुआ है। ग्रामीण श्रमिकों को मजदूरी के साथ ही वेंडरों को सामग्री का भुगतान सीधे उनके बेंक खातों में पहुँच रहा है। प्रदेश में ई-एफएमएस में अब तक 30 लाख से अधिक ई-मस्टर जारी किये गये। इस प्रणाली से 4 करोड़ 71 लाख ट्रांजेक्शन कर 5617 करोड़ रुपये का भुगतान मजदूरों तथा सामग्री प्रदाता वेंडरों के बेंक खातों में किया जा चुका है।

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