मुख्‍यमंत्री राजा नहीं बल्कि जनता का पहला सेवक होता है

भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि लोकतंत्र में मुख्यमंत्री जनता का पहला सेवक होता है। जनता की सेवा ही उनका परम धर्म है। सबके साथ न्याय हो मध्यप्रदेश सरकार ने इसी मंशा के साथ योजनाएँ तैयार की है। फिर चाहे वह मुख्यमंत्री कन्यादान योजना हो, छात्रवृत्ति, साइकिल वितरण अथवा शिक्षा ऋण गारंटी की योजना हो। प्रदेश सरकार ने बिना किसी जातिगत भेदभाव के विकास के अवसर और योजनाओं का ताना-बाना बुना है। श्री चौहान ने यह बात आज यहाँ रवीन्द्र भवन में कायस्थ समाज के समागम में कही। इस अवसर पर कायस्थ समाज ने मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान का सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय शिखर सम्मान से अभिनन्दन किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि संपूर्ण काया में स्थित होने वाले को कायस्थ कहा जाता है। जो मन, बुद्धि और आत्मा में स्थित होता है। इसी प्रकार कायस्थ प्रतिभाएं समाज के सभी क्षेत्रों में सक्रिय है। कला, साहित्य, संस्कृति, विज्ञान, राजनीति, धर्म और समाज के क्षेत्र की विभिन्न कायस्थ प्रतिभाओं का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि देश, प्रदेश के विकास में समाज का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि कायस्थ समाज की अनेक विभूतियों का उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सृष्टि को बचाने के लिये बेटियों को बचाना और बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार वृद्धावस्था में केवल बेटियों वाले दम्पत्तियों की देखभाल करेगी। उनको पेंशन देने की भी योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कायस्थ समाज से बेटा-बेटी के मध्य भेदभाव को समाप्त करने के लिये जनमत निर्माण के कार्य में नेतृत्व करने का आव्हान किया।

उच्च शिक्षा, संस्कृति एवं जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि कायस्थ समाज का देश की समृद्धि और सर्वांगीण विकास में बड़ा योगदान है। समाज की विभूतियों के कार्यों पर पूरा देश गर्व का अनुभव करता है। इसलिये सभी समाज उनका सम्मान करते हैं।

जल संसाधन एवं पर्यावरण मंत्री श्री जयंत मलैया ने कार्यक्रम में सम्मानित समाज की प्रतिभाओं को बधाई देते हुये उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री दीपक वर्मा ने कहा कि व्यक्ति पहले इंसान है उसे किसी भी दायरे में बंधकर नहीं रहना चाहिये। उन्होंने कहा कि सब भारतीय बनकर कार्य करें तभी उत्कर्ष होगा। कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री कैलाश नारायण सारंग ने कहा कि कायस्थ महासभा का निर्माण वर्ष 1887 में हुआ था उन्होंने बताया कि यह समाज शतप्रतिशत साक्षर है। पूरे देश में अटक से लेकर कटक तक समाज के सदस्य फैले हुये हैं जिनको संगठित करने का कार्य महासभा द्वारा किया जा रहा है।

कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन मध्यप्रदेश राज्य लघु वन उपज सहकारी संघ के अध्यक्ष विधायक श्री विश्वास सारंग ने दिया। आभार प्रदर्शन मध्यप्रदेश कायस्थ महासभा के प्रांतीय अध्यक्ष श्री सुनील श्रीवास्तव ने किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कायस्थ समाज के न्यायाधीश, चिकित्सक, व्यवसायी और अखिल भारतीय प्रशासनिक, पुलिस, वन और वायुसेना के सेवारत एवं सेवानिवृत्त 34 अधिकारियों को सम्मानित किया। समाज द्वारा प्रकाशित स्मारिका और बेटी बचाओ’ पत्रिका का विमोचन भी किया। उन्होंने कायस्थ महासभा की बेवसाइट का लोकार्पण किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने चित्रगुप्त भगवान के चित्र पर दीज प्रज्जवलन एवं मार्ल्यापण किया।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री चौधरी जितेन्द्र नाथ सिंह, डॉ. अमिताभ वर्मा एवं कायस्थ समाज की कई विभूतियाँ और बड़ी संख्या में समाज के सदस्य उपस्थित थे।

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