मोटे अनाज का उपार्जन शुरू

भोपाल। गेहूं के रिकार्ड उपार्जन के बाद मध्‍यप्रदेश सरकार ने चालू खरीफ मौसम में रजिस्‍टर्ड किसानों से समर्थन मूल्य पर मोटे अनाज ज्वार, बाजरा एवं मक्का का उपार्जन शुरू कर दिया है। मोटे अनाज के उपार्जन की प्रक्रिया 31 जनवरी, 2013 तक चलेगी। इस दौरान पहले से पंजीकृत किसानों से मोटे अनाज का उपार्जन ई-उपार्जन परियोजना के माध्यम से मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन के माध्यम से किया जायेगा। कार्पोरेशन को ज्वार, बाजरा, मक्का के विकेन्द्रीकृत उपार्जन के लिये नोडल एजेंसी नियुक्त किया है।

राज्य शासन ने समर्थन मूल्य योजना के अंतर्गत मोटा अनाज की उपार्जन नीति भी घोषित कर दी है। उपार्जन नीति की जानकारी आयुक्त खाद्य, नागरिक आपूर्ति, राज्य सहकारी विपणन संघ, स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन, वेयर-हाउसिंग कार्पोरेशन, राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालकों, जिला कलेक्टरों और भारतीय खाद्य निगम के महाप्रबंधक को भेजी गई है। नीति के अनुसार समर्थन मूल्य पर अच्छे औसत किस्म (एफएक्यू) का मोटा अनाज क्रय किया जायेगा, उसमें ज्वार हाईब्रीड 1500 रुपये प्रति क्विंटल, ज्वार मालदण्डी 1520 रुपये प्रति क्विंटल और बाजरा और मक्का 1175 रुपये प्रति क्विंटल शामिल है। राज्य शासन ने मोटे अनाज का संभावित उत्पादन मक्का 26 हजार 500 मीट्रिक टन, ज्वार और बाजरा एक-एक हजार मीट्रिक टन निर्धारित किया है। शासन ने जिला कलेक्टरों और संबंधित एजेंसियों को एफएक्यू खरीदी प्रक्रिया को ध्यान में रखकर निर्धारित मापदण्ड के अनुरूप ही समर्थन मूल्य पर ज्वार, बाजरा, मक्का के उपार्जन के लिए कहा है।

सभी उपार्जन केन्द्रों पर बैनर लगेगा। बैनर में समर्थन मूल्य, एफएक्यू की क्वालिटी, खरीदी एवं भुगतान की प्रक्रिया का उल्लेख रहेगा। जिला-स्तर पर खोले गये केन्द्रों से परिवहन तथा खरीदे गये माल के भण्डारण की व्यवस्था का स्थान भी पूर्व से सुनिश्चित करने को कहा गया है। प्रदेश में समर्थन मूल्य पर उपार्जित ज्वार, बाजरा, मक्का के भण्डारण के लिए भण्डार गृह उपलब्ध करवाने हेतु वेयर-हाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक कार्पोरेशन को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है।

जिलों में मोटा अनाज की खरीदी के अनुमान के अनुसार बारदानों की व्यवस्था स्टेट सिविल सप्लाइज कार्पोरेशन करेगा। शासन ने सभी संबंधितों को समर्थन मूल्य के तहत मध्यप्रदेश के पंजीकृत किसानों तथा इसी राज्य के उत्पादित ज्वार, बाजरा, मक्का को ही क्रय करने के निर्देश दिये हैं। समितियों और एजेंसियों को ज्वार, बाजरा, मक्का की खरीदी शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप सत्यापन के बाद वास्तविक किसानों से करने को कहा गया है, बिचौलियों से कदापि नहीं। किसानों को भुगतान के पहले उन्हें ऋण पुस्तिका उपलब्ध करवाना अनिवार्य किया गया है। ऋण पुस्तिका में उल्लेखित भूमि के आधार पर अनुमानित उत्पादन की मात्रा से अधिक खरीदी नहीं की जायेगी। किसान द्वारा उपलब्ध करवाये गये दस्तावेज की स्व-प्रमाणित छाया-प्रति समिति द्वारा रखी जायेगी। किसानों को समिति स्थल पर ही ई-उपार्जन प्रक्रिया के तहत रसीद दी जायेगी। खाताधारी किसानों को 24 घंटे में एवं राष्ट्रीयकृत बैंकों में 7 दिन के भीतर जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक द्वारा राशि जमा करवाई जायेगी।

शासन ने जिला-स्तर पर खरीफ उपार्जन की व्यवस्था के पर्यवेक्षण, स्कंध की गुणवत्ता तथा अन्य विषयों पर निर्णय लेने के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित की है। समिति में उप/सहायक आयुक्त सहकारी संस्थाएँ, जिला आपूर्ति नियंत्रक, जिला/शाखा प्रबंधक भारतीय खाद्य निगम, प्रबंधक जिला सहकारी बैंक, उप संचालक कृषि, जिला विपणन अधिकारी, जिला प्रबंधक वेयर-हाउसिंग कार्पोरेशन तथा कृषि उपज मंडियों के सचिव को सदस्य तथा स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन के जिला प्रबंधक को संयोजक/सदस्य मनोनीत किया है। यह समिति खरीदी संबंधी समस्त विवादों का अंतिम निराकरण करेगी। अनुभाग स्तर के लिए राजस्व, कृषि, सहकारिता विभाग तथा भारतीय खाद्य निगम/उपार्जन संस्था के प्रतिनिधियों का दल कलेक्टर द्वारा गठित किया जायेगा। यह दल खरीदी केन्द्रों का आकस्मिक निरीक्षण कर सुनिश्चित करेगा कि विक्रय के लिये पहुँचा खाद्यान्न निर्धारित स्पेशिफिकेशन के अनुसार ही हो।

किसान मोटे अनाज से संबंधित अपनी समस्याएँ टोल-फ्री व हेल्पलाइन नम्बर 155343 तथा एयरटेल व बीएसएनएल के उपभोक्ताओं द्वारा टोल-फ्री नम्बर 18002355343 पर अन्य किसी भी नेटवर्क से बिना एसटीडी कोड के दर्ज करा सकेंगे। उपार्जन एजेंसी स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन भोपाल स्थित मुख्यालय में नियंत्रण कक्ष भी स्थापित करेगी।

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