यूपीएससी में अंग्रेजी का मुद्दा उठाएं: शिवराज

भोपाल, मार्च 2013/ मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की प्रावीण्य सूची में अंग्रेजी के नम्बर जोड़ने का मुद्दा प्रधानमंत्री के सामने उठाने का अनुरोध किया है।

उल्लेखनीय है कि श्री चौहान ने हाल ही में इसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ग्रामीण एवं नगरीय परिवेश के उम्मीदवारों की स्थिति से अवगत कराया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में भारत सरकार के निर्णय का हवाला देते हुए लिखा है कि संघ लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित सिविल सेवाओं की मुख्य परीक्षा में उम्मीदवार द्वारा अंग्रेजी भाषा में अर्जित अंक के आधार पर प्रावीण्य सूची तैयार की जायेगी। ऐसा करना ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों से आने वाले ऐसे उम्मीदवारों के लिये अहितकारी होगा जहाँ अंग्रेजी भाषा में प्रतियोगी क्षमताएँ अत्यधिक सीमित हैं।

श्री चौहान ने मुख्यमंत्रियों को लिखा है कि पिछले तीन दशकों में ग्रामीण युवाओं और वंचित वर्गों के कई उम्मीदवारों ने अखिल भारतीय एवं संबद्ध सेवाओं में स्थान पाया है। परीक्षा प्रणाली में होने वाले सुधार में उम्मीदवारों को उनकी नैसर्गिक क्षमता और शिक्षा के माध्यम से हासिल किये गये गहन ज्ञान के बावजूद उन्हें प्राप्त अवसरों की सीमितता को भी ध्यान में रखना होगा।

हालांकि वैश्वीकरण के युग में अंग्रेजी के ज्ञान की जरूरत बढ़ रही है लेकिन क्षमता और कौशल सतत प्रशिक्षण एवं अध्ययन से प्राप्त किया जा सकता है। संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में उम्मीदवारों को उनकी अभिरूचि, बौद्धिक क्षमता के आधार पर चयन करने का ज्यादा जोर देना चाहिए। इसी आधार पर अत्यधिक प्रतिभावान उम्मीदवारों को तैयार किया जा सकता है। किसी भी भाषा विशेष का ज्ञान चयन प्रक्रिया का आधार नहीं बनने देना चाहिये। अंग्रेजी भाषा बोध की अर्हताकारी स्तर की परीक्षा के बाद उम्मीदवारों को किसी भी भारतीय भाषा में स्वयं को अभिव्यक्त करने के लिये प्रोत्साहित करना चाहिए। स्वतंत्रता के बाद से ही सिविल सेवाओं को प्रतिनिधिक सेवा के रूप में विस्तार देने के प्रयास किये गये हैं और इसी के फलस्वरूप वर्तमान स्थिति बनी है जब अति निर्धन और वंचित परिवारों के भी ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार सिविल सेवाओं में शामिल हो रहे हैं।

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