यूपीएससी में अंग्रेजी की अड़चन समाप्‍त हो: शिवराज

भोपाल, मार्च 2013/ मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने केन्द्रीय लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा में अंग्रेजी में प्राप्त अंक को अंतिम गणना जोड़े जाने का विरोध करते हुए केन्द्र से अंग्रेजी के संदर्भ में केन्द्रीय लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में की गई अनावश्यक तथा जनविरोधी समस्याओं को तत्काल समाप्त करने आग्रह किया है।

श्री चौहान ने इस संदर्भ में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में कहा कि अंग्रजी में प्राप्त अंक अंतिम गणना में जोड़ने से भारत के ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों के युवाओं की संभावनाओं पर ही नहीं बल्कि शहरी मलिन बस्तियों व शहरी गरीबों एवं मध्यवर्गीय युवाओं के मनोबल और भविष्य पर भी निर्मम आघात हुआ है।

श्री चौहान ने कहा कि पिछले कई दशकों में इन्हीं वर्गों से बहुत से युवा अपनी जबर्दस्त प्रतिभा के चलते भारतीय प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा, वन सेवा, राजस्व सेवा व अन्य सम्बद्ध सेवाओं में भर्ती होते रहे हैं। इन अधिकारियों के चलते प्रशासन में राज्य और समाज के बीच चला आने वाला अलगाव व परायापन दूर हुआ तथा शासन-तंत्र के प्रति लोगों के मन में आत्मीयता और विश्वास का भाव पैदा हुआ। ये युवा जिस परिवेश से निकले, वहाँ से दूसरे युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए। उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि क्या यह स्थिति आगे जारी रखने योग्य नहीं रही है।

उन्होंने कहा कि यह उम्मीद करना ज्यादती है कि ऐसे बच्चे विदेशों से पढ़कर लौटे अभिजात परिवार के बच्चों की अंग्रेजी से मुकाबला कर सकेंगे। यह कहना भी ठीक नहीं है कि कुल 2075 अंकों में से मात्र 100 अंक एक आंशिक भूमिका का निर्वाह करेंगे, क्योंकि यह एक प्रतियोगी परीक्षा है जिसमें एक-एक अंक पर तीन-तीन प्रत्याशी खड़े रहते हैं। ऐसे में ये 100 अंक निर्णायक भूमिका अदा करने जा रहे हैं। वैसे भी पहले की व्यवस्था में भी अर्हताकारी अंक प्राप्त करने का प्रावधान था, जिससे इस भाषा में न्यूनतम दक्षता का परीक्षण किया जाता रहा है। ताजा निर्णय से यह सिद्ध होता है कि अंग्रेजी को एकाधिकारी स्थान दिया जा रहा है। इससे राजभाषा हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के प्रति हमारे परिवारों में अरूचि का वातावरण पैदा होगा।

मुख्य परीक्षा में बदलाव के बाद अब साक्षात्कार के माध्यम में बदलाव की आशंका बढ़ गई है। इससे इन सेवाओं की प्रतिनिधिकता और भी कम हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने इसे दुखत बताते हुए कहा कि इनमें राज्य सरकारों से विमर्श का शिष्टाचार तक नहीं निभाया जा रहा है।

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