रोशन होता मध्यप्रदेश

बिजली विकास की धुरी है। विकास के साथ बिजली की खपत भी बढ़ती है। बिजली की खपत बढ़ना विकास के प्रमुख मापदण्डों में एक है। इसलिये, खपत बढ़ने के साथ ही बिजली उत्पादन वृद्धि पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। राज्य सरकार ने बिजली क्षेत्र के विकास को एक चुनौती के रूप में लेते हुए इसे अपनी प्राथमिकता में रखा। इसी का परिणाम है कि जहाँ विद्युत उत्पादन की स्थापित क्षमता में वृद्धि हुई, वहीं प्रदेश बिजली के क्षेत्र में आत्म-निर्भर बनने अग्रसर है।
राज्य सरकार द्वारा शु डिग्री से ही बिजली का उत्पादन बढ़ाने को प्रमुखता देने के साथ ही बिजली संयंत्रों के बेहतर रख-रखाव, वितरण-पारेषण, विद्युत के प्रबंधन आदि पहलुओं पर भी बराबर ध्यान दिया गया। यही नहीं बल्कि विद्युत की उपलब्धता बढ़ाने के लिये बैंकिंग एक्शन जैसे आधुनिक प्रयोग भी किये गये। विद्युत नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण कार्य के साथ-साथ विभिन्न विद्युत परियोजनाओं की स्थापना का कार्य जारी है। रबी मौसम में किसानों को पर्याप्त बिजली दिये जाने के साथ ही उद्योगों को भी लगातार 24 घंटे बिजली दी जा रही है। इससे उद्योगपति भी राज्य की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इंदौर स्थित स्पेशनल इकानॉमिक जोन में विद्युत की पर्याप्त उपलब्धता बढ़ाई गई है, जिससे ज्यादा से ज्यादा उद्योगपति आकर्षित हो सकें। उद्योगों को आवश्यकता अनुसार गुणवत्तापूर्ण अधिक वोल्टेज, अवरोध सहित बिजली आपूर्ति के प्रयास किये जा रहे हैं।
बिजली उत्पादन में वृद्धि
आने वाले वर्षों में प्रदेश को बिजली के क्षेत्र में आत्म-निर्भर बनाने के कारगर प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य में कुल 3162 मेगावॉट उत्पादन क्षमता वृद्धि की गई। वर्ष 2003 के 4673 मेगावॉट की तुलना में वर्ष 2011 में स्थापित क्षमता 8999 मेगावॉट हो गई है। इसमें 2452 मेगावॉट की जल विद्युत तथा 710 मेगावॉट की ताप विद्युत वृद्धि शामिल है। पूर्व के दस वर्ष 859 मेगावॉट क्षमता वृद्धि की गई थी। माह दिसम्बर, 2003 के बाद की गई क्षमता वृद्धि पूर्व के वर्षों की क्षमता वृद्धि से 268 प्रतिशत अधिक है। राज्य शासन द्वारा विद्युत उत्पादन परियोजनाओं के लिये वित्तीय सहायता के रूप में वित्तीय वर्ष 2005-06 से करीब 1774.18 करोड़ की राशि अंश-पूँजी के रूप में दी गई है। इस वर्ष इसके लिये 299.41 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।
बिजली उत्पादन बढ़ाने के ठोस प्रयास के अंतर्गत आगामी 2 वर्ष में 4742 मेगावॉट क्षमता वृद्धि का कार्यक्रम है। इसमें से इस वर्ष 1859 तथा वर्ष 2013-14 में 2883 मेगावॉट क्षमता का इजाफा किया जायेगा। विद्युत क्षमता वृद्धि के लिये विद्युत उत्पादन परियोजनाओं में निवेश के लिये नीति जारी की गई है। निजी क्षेत्र द्वारा परियोजना स्थापित किये जाने पर प्रदेश को 5 से 10 प्रतिशत वेरियेबल दर पर प्राप्त होने के साथ-साथ 30 प्रतिशत विद्युत प्राप्ति का प्रथम अधिकार होगा। इस नीति के जरिये कुल 66 हजार 550 मेगावॉट के 45 समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुए हैं।
तीन वर्ष में लगातार ज्यादा विद्युत प्रदाय
प्रदेश के संभागीय, जिला, तहसील मुख्यालयों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में गत तीन वर्ष में लगातार निर्धारित अवधि से अधिक विद्युत प्रदाय किया गया। साथ ही विगत तीन वर्ष में विद्युत प्रदाय की स्थिति में सुधार लाकर प्रत्येक वर्ष की तुलना में ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को दी गई। वित्तीय वर्ष 2011-12 में गत वर्ष की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक विद्युत दी गयी। चालू माली साल में 43 हजार 46 मिलियन तथा अगले माली साल में 52 हजार 148 मिलियन यूनिट विद्युत प्रदाय के लक्ष्य की पूर्ति के लिये इन दो वर्ष में लगभग 5 हजार मेगावॉट उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर कार्य किया जा रहा है।
वित्तीय वर्ष 2011-12 में 42 हजार 931 मिलियन यूनिट दी गई, जो वर्ष 2002-03 में दी गई 27 हजार 94 मिलियन यूनिट से 58 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह वर्ष 2011-12 में 8546 मेगावॉट अधिकतम माँग की पूर्ति की गई, जो वर्ष 2002-03 में 4652 मेगावॉट अधिकतम बिजली की माँग की आपूर्ति से 84 प्रतिशत ज्यादा है।
विद्युत हानियों में आयी कमी
प्रदेश में विद्युत क्षेत्र की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिये विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों में कमी लाने के लिये व्यापक कार्यवाही की जा रही है। कम्पनियों द्वारा हानियों में कमी लाने के लिये विजिलेंस चेकिंग, घरों के बाहर मीटर स्थापित किये जाने की कार्यवाही के साथ बड़े पैमाने पर पूँजीगत कार्य भी किये जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में ट्रांसमिशन हानियों का स्तर मात्र 3.51 प्रतिशत है, जो देश की न्यूनतम हानियों के समकक्ष है। वर्ष 2002-03 में ट्रांसमिशन हानियों का स्तर 7.93 प्रतिशत था, जिसकी तुलना में 4.42 प्रतिशत की कमी हुई है।
वित्तीय वर्ष 2011-12 में ए टी एण्ड सी हानियों का स्तर 31.62 प्रतिशत रहा, जो वर्ष 2003-04 में यह 49.55 प्रतिशत था। इस प्रकार इन हानियों में 18 प्रतिशत की कमी लाई गई है। वर्ष 2003-04 में उपभोक्ताओं की संख्या 64 लाख 43 हजार थी, जो वर्तमान में बढ़कर करीब 97 लाख हो गई है। यह वृद्धि लगभग 50 प्रतिशत है।
हानि वाले क्षेत्रों में विद्युत प्रदाय की अवधि बढ़ी
राज्य शासन द्वारा ऐसे जिले, तहसील एवं कस्बे जहाँ पर समग्र तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों का स्तर लगातार तीन माह तक 20 प्रतिशत से कम बनाये रखा जाता है, वहाँ 24 घंटे लगातार विद्युत देने का निर्णय लिया गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी में एक जिला एवं 3 तहसील, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी में 7 जिला एवं 4 तहसील एवं पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी में 3 जिला, 9 तहसील एवं 3 अन्य नगरपालिका मुख्यालय को अधिक विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। जिला मुख्यालय एवं अन्य क्षेत्रों में, जहाँ विद्युत हानि का प्रतिशत कम है वहाँ निर्धारित अवधि से ज्यादा विद्युत दी जा रही है।
उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित निराकरण
उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिये प्रदेश के बड़े शहरों में 24 घंटे शिकायत दर्ज करने के लिये कम्प्यूटरीकृत कॉल-सेंटरों की स्थापना की गई है। भोपाल शहर में इंटरनेट पर बिल-डेस्क के माध्यम से बिजली भुगतान की सुविधा प्रारंभ की गई है। इंदौर तथा जबलपुर में सभी क्षेत्रों को सर्वर के नेटवर्कंिग द्वारा जोड़कर किसी भी बिल संग्रहण केन्द्र पर संभाग के बिल को जमा करने की पेमेंट एनीह्वेयर योजना लागू की गई है।
राजस्व संग्रहण में वृद्धि
विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा पिछले माली साल में 11 हजार 521 करोड़ का राजस्व संग्रहीत किया गया। कम्पनियों द्वारा संग्रहीत किया गया माह मार्च का 1233 करोड़ का राजस्व प्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक है। यह उपलब्धि समग्र तकनीकी तथा वाणिज्यिक हानियों में कमी तथा बिजली उपभोक्ताओं से पुरानी बकाया राशि वसूली के लिये विभिन्न समाधान योजनाओं के लागू किये जाने से हासिल हुई है। राजस्व संग्रहण में वृद्धि के साथ-साथ एटी एण्ड सी हानियों में कमी लाने से राजस्व प्रति यूनिट में भी लगातार इजाफा हुआ है। वर्ष 2011-12 में पूर्व वर्ष की तुलना में 11 हजार 521 करोड़ का अधिक राजस्व संग्रहण किया गया। वृद्धि का यह प्रतिशत 23 रहा। वर्ष 2010 तथा 2011 में 9399 करोड़ का राजस्व संग्रहण हुआ था जो वृद्धि का 26 प्रतिशत था।
फीडर सेपरेशन का कार्य प्रगति पर
प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के घरेलू उपभोक्ताओं को लगातार 24 घंटे तथा कृषि कार्य के लिये 8 घंटे नियमित तथा गुणवत्तापूर्ण विद्युत प्रदाय के लिये लागू फीडर विभक्तिकरण योजना का कार्य भी प्रगति पर है। अब तक 1,213 फीडरों का विभक्तिकरण किया जाकर 5 हजार से ज्यादा गाँव को लाभान्वित किया गया है। प्रदेश में कुल 6,262 फीडरों का विभक्तिकरण किया जाना है। इसके लिये वित्तीय संस्था आरईसी से 1721 करोड़ तथा एडीबी से 1944 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया है। माह दिसम्बर, 2012 तक 5,197 तथा मार्च, 2013 तक सभी 6,262 फीडरों के विभक्तिकरण का लक्ष्य है।
ट्रांसफार्मर मैनेजमेंट सिस्टम लागू
राज्य शासन ने आगामी रबी मौसम से एसएमएस आधारित ट्रांसफार्मर मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया है। अब किसानों द्वारा एसएमएस के माध्यम से खराब ट्रांसफार्मर बदलवाये जा सकेंगे। रबी मौसम में ट्रांसफार्मर खराब होने की प्रथम सूचना संबंधित अधिकारियों को समय से न मिलने के कारण कृषकों की शिकायत बनी रहती थी कि उनके खराब ट्रांसफार्मर समय से एवं वरीयता क्रम में नहीं बदले जा रहे। शासन द्वारा इस कमी को दूर करने के लिये ट्रांसफार्मर मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया गया है।
किसानों के लिये पम्प अनुदान योजना
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषकों को स्थाई विद्युत पम्प कनेक्शन देने के लिये अनुदान योजना लागू की गई है। अब 5 हार्स-पॉवर या उससे अधिक क्षमता के स्थाई कनेक्शन लेने वाले लघु तथा सीमांत कृषकों को 5 हजार रुपये प्रति हार्स-पॉवर की दर से तथा अन्य कृषकों को 8 हजार रुपये प्रति हार्स-पॉवर की दर से अग्रिम राशि जमा करने पर एवं प्राक्कलन राशि 1.50 लाख तक की सीमा आने पर शेष राशि राज्य शासन द्वारा अनुदान के रूप में विद्युत वितरण कम्पनियों को उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान है। कम्पनियों द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 9.50 लाख अस्थाई कनेक्शन दिये जाते हैं। शासन द्वारा अस्थाई पम्प कनेक्शन के स्थान पर स्थाई कनेक्शन दिये जाने के लिये यह अनुदान योजना शु डिग्री की गई है।
रबी में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर
राज्य शासन ने रबी सीजन में किसानों को स्थाई तथा अस्थाई पम्प कनेक्शन के अधिकतम भार के मद्देनजर वितरण ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाने तथा अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की स्थापना का निर्णय लिया है। इसके लिये तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा कार्य-योजना तैयार की गई है। शासन ने ट्रांसफार्मर फेल होने की दर में कमी लाने के लिये इस वर्ष 2 अरब 52 करोड़ 19 लाख रुपये का प्रावधान किया है।
ओह्वर लोड ट्रांसफार्मर का चिन्हांकन
राज्य शासन ने कम्पनियों को निर्देश दिये हैं कि आगामी रबी सीजन के पूर्व पिछले वर्ष के भार को देखते हुए स्थापित ओह्वर-लोड वितरण ट्रांसफार्मर को चिन्हित कर लिया जाये। ट्रांसफार्मर फेल होने की दर में कमी लाने के मद्देनजर अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की स्थापना पर भी विशेष ध्यान दिया जाये।
ट्रांसमिशन क्षमता तथा उप केन्द्रों की संख्या में वृद्धि
वित्तीय वर्ष 2011-12 में ट्रांसमिशन क्षमता बढ़कर 8489 मेगावॉट हो गई। यह वृद्धि 118 प्रतिशत है। वर्ष 2003 के अंत में ट्रांसमिशन क्षमता 3890 मेगावॉट थी। वर्ष 2003-04 में अति-उच्च दाब उप केन्द्रों की संख्या 162 थी, जो वर्ष 2011-12 में बढ़कर 244 हो गई है। यह वृद्धि 51 प्रतिशत है। ट्रांसमिशन प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के लिये आगामी दो वर्ष में लगभग 2060 करोड़ निवेश का कार्यक्रम बनाया गया है। इस दौरान उप केन्द्रों की क्षमता में 4644 एम.ह्वी.ए. की क्षमता वृद्धि की जायेगी।
वर्ष 2003-04 में 33 के.ह्वी. लाइन की लम्बाई 30 हजार 90 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर 39 हजार 997 किलोमीटर हो गई है। यह वृद्धि लगभग 33 प्रतिशत है। इसी प्रकार वर्ष 2003-04 में 11 के.ह्वी. लाइनों की लम्बाई 1 लाख 61 हजार 808 किलोमीटर थी, जो बढ़कर 2 लाख 14 हजार 918 किलोमीटर हो गई है। यह वृद्धि भी 33 प्रतिशत दर्ज की गई है। वर्ष 2003-04 में 33/11 के.ह्वी. उप केन्द्र की संख्या 1810 थी, जो अब बढ़कर 2685 हो गई है। इस वृद्धि का प्रतिशत 47 है। राज्य शासन द्वारा उप-पारेषण तथा वितरण के क्षेत्र में आगामी दो वर्ष में 5719 करोड़ पूँजी निवेश का कार्यक्रम भी बनाया गया है।

ताहिर अली

(लेखक मध्‍यप्रदेश जनसंपर्क विभाग में संयुक्‍त संचालक हैं)

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