वाटरशेड में नवाचार पर राष्ट्रीय पुरस्कार

भोपाल, फरवरी 2015/ मध्यप्रदेश द्वारा एकीकृत जलग्रहण क्षेत्र प्रंबधन कार्यक्रम के परिणाममूलक क्रियान्वयन के लिए अपनाये जा रहे नवाचारों की सराहना करते हुए भारत सरकार द्वारा प्रदेश के रिमोट सेंसिंग आधारित प्लान का चयन बेस्ट प्रेक्टिसेस की श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार के लिये किया गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 19 फरवरी, 2015 को नई दिल्ली में एक समारोह में प्रदेश को इस राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा जायेगा। केन्द्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री वीरेन्द्र सिंह चौधरी यह पुरस्कार देंगे।

प्रदेश में वाटरशेड परियोजनाएँ एकीकृत जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम में क्रियान्वित की जा रही हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में जल संरक्षण, संवर्धन तथा मृदा संरक्षण का कार्य करना है, जिससे कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी कर संवहनीय ग्रामीण आजीविका सुनिश्चित की जा सके। वर्तमान में प्रदेश में 29.35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 3522 करोड़ की परियोजनाएँ संचालित हैं।

परियोजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सुनियोजित प्रयास हो रहे हैं। परियोजना स्तर पर पूर्णकालिक वाटरशेड डेव्हलपमेंट टीम की नियुक्ति की गई है। स्वयंसेवी संगठनों और कॉरपोरेट संगठनों को भी कार्यक्रम से जोड़ा गया है। कार्यक्रम के लिए पी.आर.ए. और नेट प्लान जैसे सर्वेक्षण के अतिरिक्त रिमोट सेंसिंग एवं जी.आई.एस. आधारित प्लानिंग को भी अपनाया गया है। परियोजना कार्यों की सतत् मॉनीटरिंग के लिये एनरॉइड मोबाईल आधारित एप्लीकेशन ”डब्लूएमजीओ” का उपयोग किया जा रहा है।

कार्यक्रम में रिमोट सेंसिंग आधारित प्लानिंग के लिए कार्टोसेट-1 सेटेलाईट का हाई रेजोल्यूशन पेनक्रोमेटिक डेटा और लिस-4 का हाई रेजोल्यूशन डेटा तथा जियोरिफ्रेन्स खसरा नक्शे का उपयोग किया गया है। इस डिजिटल डाटा का उपयोग करते हुए 1 : 10000 स्केल के नामतः माइक्रो वाटरशेड बाउंड्री, ड्रेनेज, खसरा, एवं कंटूर नक्शा तैयार किये गये हैं। इसके साथ ही प्राकृतिक रंग की सेटेलाइट इमेजरी भी तैयार की गई है। इन नक्शों का उपयोग करते हुए विभिन्न वाटरशेड विकास कार्यों – गलीप्लग, गेबियन, चेकडेम, स्टाप डेम, तालाब, फॉर्म पोण्ड, कंटूर ट्रेंच, फील्ड बण्ड, वृक्षारोपण और चारागाह विकास के लिए उपयुक्त स्थलों का निर्धारण कर प्लान फील्ड टीम को दिया गया है। प्लान के अनुसार तथा फील्ड में टीम द्वारा स्वयं की गई नेट प्लानिंग के आधार पर ग्रामवार अंतिम कार्य-योजना तैयार की गई है।

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