विकास के अदभुत दौर से गुजर रहा है मध्यप्रदेश: शिवराज

भोपाल, अगस्‍त 2013/ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश बीमारु राज्य के कलंक से मुक्त होकर नागरिकों के अथक परिश्रम से विकास के अदभुत दौर से गुजर रहा है। प्रदेश अब तरक्की और खुशहाली की नई मंजिलों की ओर चल पड़ा है। मध्यप्रदेश को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनायेंगे। श्री चौहान राजधानी भोपाल में स्वतंत्रता दिवस के राज्य-स्तरीय मुख्य समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने नागरिकों के नाम अपने संदेश में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और क्रांतिकारियों का स्मरण करते हुए कहा कि भारत की ओर कोई आँख उठाकर देखेगा तो उसे सहन नहीं किया जायेगा। उन्होंने भव्य और आकर्षक समारोह में ध्वजारोहण किया और रस्मी परेड की सलामी ली। श्री चौहान ने पुलिस पदक प्रदान किये।

मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के हित में घोषणा करते हुए कहा कि जिन कर्मचारियों को सेवाकाल में दो क्रमोन्नति, दो पदोन्नति या समयमान-वेतनमान का लाभ मिला है उन्हें तीसरे समयमान-वेतनमान का लाभ भी मिलेगा।

श्री चौहान ने कहा कि आज मध्यप्रदेश एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा सालाना बजट वाला प्रदेश है। एक दशक पूर्व यह महज 21 हजार 647 करोड़ रुपये था। विकास दर जो ऋणात्मक थी अब 10.02 फीसदी पहुँच गई है। सकल घरेलू उत्पाद भी तीन गुना बढ़ गया है। प्रति व्यक्ति आय भी तीन गुने से ज्यादा हो गई है।

प्रदेश में पिछले दो साल से लगातार देश में सर्वाधिक कृषि विकास दर रही है। किसानों को सहकारी बैंकों से फसल ऋण दिये गये हैं। 70 लाख किसान के पास किसान क्रेडिट-कार्ड हैं। नाबार्ड के सहयोग से कोर-बैंकिंग लागू की जा रही है। भण्डारण क्षमता को बढ़ाने के लिये अब तक लगभग 1300 प्राथमिक सहकारी संस्थाओं को निःशुल्क भूमि दी गई है। गेहूँ खरीदी पर 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने के बाद इस वर्ष मक्के की फसल पर भी बोनस दिया जायेगा। उपार्जन में प्रदेश ने अभूतपूर्व कीर्तिमान कायम किया है।

प्रदेश में वर्ष 2004 में दुग्ध उत्पादन 5.38 मिलियन टन से बढ़कर आज 8.83 मिलियन टन हो गया। एक दशक में सिंचाई क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। सिंचाई जल के बेहतर उपयोग के लिये राज्य माइक्रो इरीगेशन मिशन प्रारंभ किया गया है। नर्मदा नदी को क्षिप्रा नदी से जोड़ने का अभियान शुरू किया गया है। बिजली के क्षेत्र में प्रदेश अभूतपूर्व क्रांति के दौर से गुजर रहा है। अटल ज्योति अभियान के जरिये पूरे प्रदेश में शहरी और घरेलू आबादी को दिन-रात बिजली और सिंचाई के लिये कम से कम 10 घंटे बिजली मिल रही है। इससे गाँवों में रोजगार के अवसर सृजित होंगे। हमारा संकल्प है कि प्रदेश में निवेश से रोजगार और रोजगार से विकास हो।

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और मुख्यमंत्री निकाह योजना के अन्तर्गत अब तक लाखों विवाह संपन्न हो चुके हैं। बेटी बचाओ अभियान से समाज के सभी वर्ग जुड़ रहे हैं। लाड़ली लक्ष्मी योजना में अब तक करीब 15 लाख बेटियों को लाभ दिया गया है। गर्भवती माताओं और बीमार बच्चों के लिये आपातकालीन परिवहन सेवा में 900 से ज्यादा वाहन और 50 कॉल सेंटर उपलब्ध हैं। मातृ मृत्यु दर प्रति लाख जन्म 379 से घटकर 277 हो गई है।

मुख्यमंत्री शहरी घरेलू कामकाजी महिलाओं की कल्याण योजना में आई.टी.आई., कौशल विकास केन्द्र, पॉलीटेक्निक तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को रोकने के लिये वर्ष 2012 में कुल 806 प्रकरण में आरोपियों को सजा दिलाई गई एवं वर्ष 2013 में अब तक 544 सत्र प्रकरण में। इसी वर्ष अब तक 10 ऐसे प्रकरण में अपराधियों को मृत्यु दण्ड तथा 264 को आजीवन कारावास की सजा दिलाई गई।

श्री चौहान ने युवाओं का आव्हान किया कि वे नौकरी मांगने वाले नहीं, देने वाले बनें। प्रदेश की धरती से बड़े उद्यमी निकलें, युवाओं में उद्यमिता के गुण विकसित हों। इस दृष्टि से मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार जैसी योजनाएँ लागू की गई हैं।

युवाओं के लिये शैक्षणिक अवसरों को बेहतर बनाने की चर्चा करते हुए श्री चौहान ने कहा कि 7 नये विश्वविद्यालय और 82 नये शासकीय महाविद्यालय स्थापित किये गये हैं। इसके अलावा 110 महाविद्यालय में कौशल विकास योजना लागू की गई है। तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिये प्रदेश के 38 पॉलीटेक्निक महाविद्यालयों में 50 सीटर महिला छात्रावास स्थापित किये जा रहे हैं। 21 नये पॉलीटेक्निक खोले गये हैं। जबलपुर में मेडिकल विश्वविद्यालय तथा सागर में चिकित्सा महाविद्यालय आरंभ हो गया है तथा रतलाम, शहडोल और विदिशा में चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।

प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा के संबंध में श्री चौहान ने कहा कि बच्चों को दाखिला दिलवाने की दर 99 प्रतिशत तक पहुँच गई है। अब प्रदेश में शिक्षाकर्मी नहीं बल्कि अध्यापक हैं। हमने इन्हें समान कार्य समान वेतन देने का निर्णय लिया है। खेल एवं युवा कल्याण विकास का बजट 6 करोड़ 24 लाख से बढ़कर 112 करोड़ 90 लाख रुपये हो गया है। राष्ट्रीय खेलों में प्रदेश ने 1600 से अधिक पदक जीते हैं।

अनुसूचित जातियों, जनजातियों, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक, गरीबों तथा निराश्रितों के कल्याण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुल 1 लाख 82 हजार वनाधिकार के पट्टे देकर मध्यप्रदेश भारत में सबसे आगे है। इनमें से एक लाख से अधिक पट्टाधारियों के क्रेडिट कार्ड बने और उन्हें ऋण सुविधा भी मिल रही हैं। प्रदेश में ऐसे गरीब जिनके पास स्वयं के रहने की जमीन नहीं है तो वे जिस जमीन पर रह रहे हैं उन्हें उसका पट्टा दिया जायेगा। बाँस विदोहन शुल्क का पूरा लाभांश बाँस काटने वालों को देने का प्रावधान पहली बार प्रदेश में हुआ है। वनोपज पर समर्थन मूल्य देने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला प्रदेश है। बैगा, सहरिया, भारिया, कोल जैसी विशेष जनजातियों के लिये विकास अभिकरण बनाए गए हैं।

अनुसूचित जाति कल्याण के क्षेत्र में पिछले नौ वर्ष में शिक्षा बजट में साढ़े चार गुना, छात्रावासों की सीट में दोगुनी, प्रशिक्षण व्यय में 25 गुना, स्वरोजगार प्रशिक्षणार्थियों की संख्या में सौ गुनी और छात्रावास निर्माण राशि में चार गुना वृद्धि की गई हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों को निजी और इंजीनियरिंग में प्रवेश पर भी राज्य शासन द्वारा उनकी फीस दी जायेगी। पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिये नई योजनाएँ शुरू की गई है। उर्दू अकादमी, वक्फ बोर्ड, हज कमेटी और मसाजिद कमेटी भोपाल के बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब हितग्राहियों को योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुँचाने के लिये जिला स्तरीय 435 मेलों में 85 लाख से ज्यादा हितग्राही को लाभ मिला है। मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के अंतर्गत अब 1 रुपये किलो गेहूँ, 2 रुपये किलो चावल तथा 1 रुपये किलो आयोडाइज्ड नमक उपलब्ध करवाने के लिये प्रदेश सरकार एक हजार करोड़ रूपये से अधिक की सब्सिडी दे रही है। अकेले रहने वाले गरीब वरिष्ठ नागरिकों के लिये अंत्योदय अन्न योजना लागू की गई है।

मुख्यमंत्री रिक्शा चालक हाथ-ठेला कल्याण योजना में रिक्शा चालकों और हाथ-ठेला चालकों को वित्तीय सहायता की चर्चा करते हुए श्री चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री घरेलू कामकाजी महिला योजना में कामकाजी महिलाओं को फोटो परिचय-पत्र दिलवाया गया है। मुख्यमंत्री खेतिहर मजदूर सामाजिक सुरक्षा योजना में परिवारों को प्रसूति सहायता, छात्रवृत्ति, बीमा-दुर्घटना सहायता, विवाह सहायता, अंतिम संस्कार के लिये सहायता जैसी सुविधाएँ मिल रही हैं। शहरों में काम की तलाश में आने वाले गरीब मजदूरों के लिये 100 से ज्यादा रैन बसेरों का संचालन हो रहा हैं। स्पर्श अभियान में 8 लाख निःशक्त व्यक्तियों को जरूरी उपकरण और उपचार तथा आर्थिक सहायता मुहैया करवाई गई है।

अधोसंरचना विकास की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2003 से अब तक लगभग 95 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 52 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण कर प्रदेश को देश में प्रथम स्थान मिला। साथ ही 10 हजार 249 किलोमीटर स्टेट हाईवे का निर्माण भी इस अवधि में हुआ। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में शामिल होने से वंचित क्षेत्रों के लिये मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना लागू की गयी है। मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में करीब 16 हजार किलोमीटर सड़कें बन रही हैं। पंच परमेश्वर योजना में गाँवों के अंदर की सड़कों, नाली के निर्माण करने के लिये ग्राम पंचायतों को अब तक 2 हजार 800 करोड़ रुपये की राशि दी गई है। मुख्यमंत्री आवास मिशन अंतर्गत एक लाख ग्रामीण स्वयं अपना मकान बना रहे हैं।

मुख्यमंत्री पेयजल योजना के अंतर्गत अब तक 2 हजार 839 योजनाएँ पूर्ण की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना के जरिये 37 नगरीय निकाय में 500 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य प्रारंभ किये गये हैं। औद्योगिक निवेश की वृद्धि से रोजगार के अवसर बढ़े हैं और राज्य के राजस्व में भी वृद्धि हुई है। प्रदेश टेक्सटाईल, ऑटो-मोबाईल, पॉवर और आई.टी. के हब के रूप में विकसित हो रहा है। चार नये इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर भोपाल-इन्दौर, भोपाल-बीना-सागर, जबलपुर-सतना-सिंगरौली और मुरैना-ग्वालियर-गुना विकसित किये जा रहे हैं।

इलाज की बुनियादी सुविधा के संबंध में श्री चौहान ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल निःशुल्क औषधि वितरण योजना में सभी जिला अस्पतालों में न्यूनतम आवश्यक दवाएँ मुफ्त दी जा रही हैं। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने की निःशुल्क परिवहन सुविधा से 60 लाख से ज्यादा महिलाएँ लाभान्वित हुई हैं। शिशु मृत्यु दर वर्ष 2004 में 86 प्रति हजार थी जो कम होकर 59 प्रति हजार हो गई है। संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 24 से बढ़कर 84 प्रतिशत हुआ है। शासकीय अस्पतालों में उपलब्ध बिस्तरों की संख्या 9 हजार 800 से बढ़कर 13 हजार 400 हो गई है। नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है। कुपोषण से मुक्ति के लिये अटल बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन संचालित किया गया है।

मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना में अभी तक करीब डेढ़ लाख बुजुर्गों ने देश के विभिन्न तीर्थ-स्थान के दर्शन किये हैं। श्रीलंका में सीताजी का मंदिर, साँची के पास बौद्ध विश्वविद्यालय तथा भोपाल में हज हाउस बनाया जा रहा है। पर्यटन क्षेत्र को उद्योग का दर्जा दिया गया है। पिछले 10 वर्ष में सरकार द्वारा पुलिस के 30 हजार 151 पद की वृद्धि की गई है। पुलिस प्रशिक्षण का उन्नयन एवं आधुनिकीकरण किया जा रहा हैं।

लोक प्रशासन में नवाचार का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने कहा कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत 1 करोड़ से अधिक आवेदकों के मामलों का समय-सीमा में निराकरण हुआ है। देश के 14 राज्यों ने इस नवाचार को अपनाया है। पारदर्शी प्रशासन के लिये ई-टेण्डर, ई-उपार्जन, समाधान ऑनलाइन, जन-सुनवाई योजनाएँ लागू की गयी हैं। श्री चौहान ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों का आव्हान किया कि वे देश-प्रदेश विकास के विकास में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें।

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