विकास के रंग में रंग रहे गांव

भोपाल। मध्यप्रदेश के हजारों गाँव विकास के नए रंगों से सँवर रहे हैं। राज्य के 52 हजार गाँव की तस्वीर बदलने के लिये विकास के नए कार्यक्रम शुरू किये गये हैं। गाँव के आंतरिक विकास के लिये वित्तीय संसाधनों की जरूरतें पंच-परमेश्वर योजना से पूरी हुई हैं। अब गाँवों की आबादी के अनुसार पाँच से 15 लाख रुपये तक की राशि हर ग्राम-पंचायत को मिल रही है। पिछले साल 1473 करोड़ रुपये इस योजना में प्रदेश की 23,012 ग्राम-पंचायतों को उपलब्ध कराये गये हैं। इससे गाँवों में पक्के आंतरिक पथ सी.सी. रोड, पक्की नालियाँ, आँगनवाड़ियों का निर्माण तथा पर्यावरण सुधार और गाँवों में साफ-सफाई के काम किये जा रहे हैं। चालू माली साल में 1900 करोड़ रुपये का प्रावधान इस योजना में किया गया है। देश के विभिन्न राज्यों ने मध्यप्रदेश की इस अनूठी योजना के अनुसरण की पहल की है।

बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिये सभी गाँव को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में अब तक 11 हजार 186 करोड़ रुपये की लागत से कुल 49 हजार 775 किलोमीटर लम्बी 10 हजार 874 सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। इन सड़क के निर्माण से एक हजार से अधिक आबादी वाले 5,769 गाँव और 500 तक की आबादी वाले 4,100 गाँव को बारहमासी सड़कों की सम्पर्क सुविधा मिल चुकी है। योजना में वर्ष 2011-12 में 877 करोड़ 60 लाख रुपये लागत से 2926 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया है। इस दौरान 239 करोड़ 80 लाख रुपये लागत से पूर्व निर्मित 2329 किलोमीटर लम्बी सड़कों का नवीनीकरण किया गया है। इसके अलावा पाँच वर्ष पहले बनी 9000 किलोमीटर लम्बी सड़कों का संधारण भी हुआ है। राज्य में 800 तक की आबादी वाले गाँवों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने के लिये वर्ष 2012-13 में 1722 किलोमीटर लम्बी 426 सड़कों के निर्माण के लिये 634 करोड़ 30 लाख रुपये की मंजूरी केन्द्र को मिली है।

मध्यप्रदेश में एशियन डेव्हलपमेंट बैंक की वित्तीय सहायता से भी सड़कें बनाई जा रही हैं। मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क प्राधिकरण द्वारा एडीबी की मदद से 9,658 किलोमीटर लम्बी 1991 सड़क के निर्माण का काम हाथ में लिया गया है। इनमें से अब तक 7,296 किलोमीटर लम्बाई की 1,423 सड़कें बन चुकी हैं। केन्द्र ने गत वित्तीय वर्ष में समेकित कार्य-योजना में शामिल प्रदेश के 8 जिलों में 1656.71 किलोमीटर लम्बे 458 सड़क मार्ग को बनाने के लिये 532 करोड़ 82 लाख रुपये की मंजूरी दी। इससे इन जिलों में 996 बसाहट को आवागमन सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इन सड़कों के निर्माण की प्रक्रिया जारी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में बनाई गई सड़कों पर 96 बड़े पुल के निर्माण की मंजूरी भी मिल चुकी है। इनमें से 14 पुल के निर्माण काम पूरा हो चुका है।

मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत राज्य में 500 से कम आबादी वाले सामान्य गाँवों और 250 से कम आबादी वाले अनुसूचित-जनजाति बहुल गाँवों में बारहमासी पक्की सड़कें बन रही हैं। अब तक 1590 किलोमीटर लम्बी 879 सड़कों का तथा इन पर 2913 पुल-पुलियाओं का निर्माण कर आवश्यक व्यवस्थाओं को सुगम बनाया गया है। इस योजना में 5943 पुल-पुलियाओं और 1851 किलोमीटर ग्रेवल रोड के निर्माण से 1287 गाँवों को मुख्य मार्ग से जोड़ लिया गया है। वर्तमान में 13,108 किलोमीटर सड़कों का निर्माण प्रगति पर है।

ग्रामीण अँचलों के समग्र विकास के लिये सम्पर्क सुविधाओं की उपलब्धता को प्राथमिकता दी जा रही है। सड़क-संपर्क, बैंकिंग सुविधा के साथ ही ई-कनेक्टिविटी का काम तेजी से हो रहा है। राज्य की सभी 23,012 ग्राम-पंचायतों में ई-पंचायतों की शुरूआत का काम किया जा रहा है। जिन ग्रामों में ब्राड-बैण्ड सुविधा है वहाँ सबसे पहले ई-पंचायतें आरंभ हो रही हैं। ग्रामीण अँचलों के विकास के लिये बैंकिंग सुविधाओं की उपलब्धता पर खास ध्यान दिया जा रहा है। राज्य के 14 हजार गाँव ऐसे हैं जहाँ आज भी 30 से 40 किलोमीटर तक बैंकिंग सुविधाएँ नहीं हैं, वहाँ अल्ट्रा स्माल बैंक, मोबाईल बैंकिंग, बैंक कियोस्क तथा व्यवसाय प्रतिनिधियों के माध्यम से बैंकिंग सुविधाएँ उपलब्ध कराने का काम तेजी से शुरू किया गया है। ग्रामीणों को उनके घर के आसपास 5 किलोमीटर के दायरे में बैंक सुविधा उपलब्ध कराने से उनके आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

प्रदेश के ग्रामीण अँचलों में आवास समस्या के समाधान के लिये विगत 22 फरवरी, 2011 को मुख्यमंत्री ग्रामीण मिशन शुरू हुआ है। मिशन के माध्यम से गरीब ग्रामीणों को आवास निर्माण के लिये 30 हजार का ऋण बैंकों के माध्यम से दिया जाता है। इस योजना में राज्य शासन की ओर से 30 हजार का अनुदान आवासहीन हितग्राही को दिया जाता है और मात्र 10 हजार की राशि हितग्राहियों को अपनी ओर से देना होती है। अब तक प्रदेश में इस योजना में 3 लाख से अधिक आवेदन-पत्र प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से एक लाख 15 हजार से अधिक आवेदन बैंक को भेजे जा चुके हैं और बैंक द्वारा करीब 60 हजार आवेदन-पत्र को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना में 21 हजार से अधिक आवास का निर्माण इन दिनों जारी है।

ग्रामीण आवासहीन बीपीएल परिवारों के लिये वर्ष 2011-12 में 317 करोड़ 55 लाख रुपये लागत से 72,135 इंदिरा आवासों का निर्माण किया गया है। चालू वित्तीय वर्ष में 84350 आवास बनाये जायेंगे। अजा एवं अजजा के गरीब आवासहीन परिवारों को मुख्यमंत्री अंत्योदय आवास योजना में शत-प्रतिशत अनुदान के आधार पर 45 हजार रुपये लागत के मकान बनाकर दिये जा रहे हैं। वर्ष 2011-12 में 18 करोड़ 20 लाख रुपये लागत से 5530 आवास बनाकर दिये गये हैं। चालू माली साल में 6449 आवास बनाये जा रहे हैं।

ग्रामीण अँचलों में खुले में शौच की आदत को समाप्त करने और स्वच्छता तथा महिलाओं के सम्मान की सुरक्षा के लिये मर्यादा अभियान की शुरूआत की गई है। प्रथम चरण में 5800 गाँवों में जहाँ नल-जल योजनाएँ हैं वहाँ अभियान शुरू हुआ है। इस योजना में 15 लाख शौचालयों का निर्माण हो रहा है तथा गरीबी की रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों को 4600 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य की 1,14,193 शालाओं के 80.66 लाख विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया है। चालू माली साल में 1,15,132 शालाओं के 84.55 लाख बच्चों को कार्यक्रम का लाभ दिया जायेगा।

एकीकृत जल-ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में 2200 करोड़ रुपये लागत की 326 नई परियोजनाएँ मंजूर हुई हैं। इस परियोजना में 18.34 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का उपचार किया जायेगा।

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