विभागीय परीक्षा की नई प्रणाली एक जुलाई से

भोपाल, अप्रैल 2015/ राज्य शासन ने विभागीय परीक्षाओं की वर्तमान व्यवस्था को समाप्त कर सभी विभाग में नव-नियुक्त/पदोन्नत शासकीय सेवकों के लिये अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों का निर्धारण करने के निर्देश दिये हैं। प्रशिक्षण, विभाग के अपने प्रशिक्षण संस्थान, अन्य विभाग की प्रशिक्षण संस्थाओं या प्रशासन अकादमी द्वारा होगा। यह नई प्रणाली एक जुलाई, 2015 से लागू होगी।

राज्य शासन ने प्रशासन अकादमी के तहत विभिन्न विभाग के अधिकारियों की विभागीय परीक्षाओं की व्यवस्था के पुनरीक्षण के लिये गठित समिति की अनुशंसाओं के आधार पर यह सुधारात्मक निर्देश जारी किये हैं। निर्देशों में कहा गया है कि राज्य सिविल सेवा तथा राजस्व विभाग के नव-नियुक्त अधिकारियों के लिये प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षण कार्यक्रम किये जायें। नव-नियुक्त शासकीय सेवकों को उनके पदीय कर्त्तव्यों के समुचित निर्वहन के लिये विधिक, प्रशासनिक, वित्तीय तथा अन्य पहलु पर पर्याप्त रूप से प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किये जायें।

प्रशिक्षण के अंत में परीक्षा का आयोजन कर परीक्षार्थियों द्वारा हासिल ज्ञान एवं कौशल का मूल्यांकन किया जाये। उत्तीर्ण शासकीय सेवकों को प्रशिक्षण सफलता से पूरा करने का प्रमाण-पत्र प्रशिक्षण संस्था द्वारा दिया जाये। निर्धारित प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलता से पूरा करने वाले शासकीय सेवक को वेतन वृद्धि, स्थायीकरण, वरिष्ठता, पदोन्नति आदि सभी सेवा लाभ दिये जायें, जो वर्तमान में विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करने पर देय होते हैं। साथ ही उसे स्वतंत्र प्रभार में पद-स्थापना करने की अर्हता हो। इसके लिये नियमों में आवश्यक संशोधन किये जायें। प्रशासन अकादमी तथा अन्य विभागीय प्रशिक्षण संस्थाओं का आवश्यकतानुसार सुदृढ़ीकरण किया जाये, जिससे इस दायित्व का सक्षमता से निर्वहन हो सके। प्रशिक्षण के बाद परीक्षाओं में परीक्षार्थी को पुस्तकों के उपयोग की अनुमति हो। निर्देश में यह भी कहा गया है कि प्रश्न-पत्र इस तरीके से बनाये, जिससे परीक्षार्थी की विषय की समझ और उसके व्यवहारिक उपयोग के कौशल का आकलन हो सके।

राज्य शासन ने कहा कि एक जुलाई के पहले सभी विभाग इस परिवर्तन के लिये सभी जरूरी तैयारी पूरी कर लें। विभागों द्वारा नव-नियुक्त शासकीय सेवकों के लिये राज्य के विश्वविद्यालयों के सहयोग से उपाधि/पत्रोपाधि पाठ्यक्रम तैयार कर प्रशिक्षण को उक्त उपाधि-पत्रोपाधि के साथ जोड़ने की व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में चरणबद्ध रूप से कदम उठायें।

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