वैश्विक मंदी के दौर में मध्यप्रदेश ने दिखाई आर्थिक मजबूती

पूरी दुनिया में आज आर्थिक मंदी का भीषण दौर चल रहा है। अमेरिका और यूरोपीय देशों तथा चीन जैसे कद्दावर अर्थ-व्यवस्था वाले देश इससे बुरी तरह प्रभावित हैं। अमेरिका में वर्ष 2012 में ट्रेड डेफिसिट 500 से 600 बिलियन डालर तक होने की आशंका है। चीन की विकास दर भी इस साल कम होकर 7.5 प्रतिशत के आसपास आ गई है। ऐसी विकट स्थिति में मध्यप्रदेश ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में अद्भुत उपलब्धियाँ हासिल की हैं। बीते कुछ वर्ष में प्रदेश की समग्र अर्थ-व्यवस्था तो मजबूत हुई ही है, औद्योगिक विकास भी अभूतपूर्व हुआ है।
भारत सरकार के केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन के आँकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश ने वर्ष 2011-12 में 18 प्रतिशत कृषि विकास दर हासिल की, जो देश में सर्वोच्च है। इसके साथ ही प्रदेश की आर्थिक विकास दर (जीएसडीपी) में हुए 12 प्रतिशत के शानदार इज़ाफे ने इस उपलब्धि में चार चाँद लगा दिये हैं।
वर्ष 2011-12 में मध्यप्रदेश ने आर्थिक विकास दर के मामले में विकसित कहे जाने वाले बड़े-बड़े धुरंधर राज्यों को काफी पीछे छोड़ दिया है। इनमें गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब और तमिलनाडु शामिल हैं।
ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007-11) में मध्यप्रदेश ने विकास की लम्बी छलांगें लगायी हैं। योजना अवधि में प्रदेश के लिए 7.6 प्रतिशत आर्थिक विकास दर का लक्ष्य रखा गया था, जिसे दो वर्ष पहले ही पीछे छोड़कर योजना अवधि के अंत में 10.20 प्रतिशत औसत विकास दर हासिल की गयी। इससे पहले नवमी पंचवर्षीय योजना (1997-2002) में आर्थिक विकास दर 3.12 तथा दसवीं योजना (2002-07) में यह 8.49 प्रतिशत थी। इसी तरह, ग्यारहवीं योजना अवधि में औसत कृषि विकास दर 9.04 प्रतिशत रही, जो एक शानदार उपलब्धि है। इस दौरान देश की औसत कृषि विकास दर 3.3 प्रतिशत ही रही।
औद्योगिक विकास
मध्यप्रदेश में उद्योग के क्षेत्र में राज्य सरकार की सकारात्मक नीतियों तथा अधोसंरचना के क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व कार्यों की बदौलत बीते 7-8 साल में औद्योगिक विकास बहुत तेजी से हुआ है। बीते 5 वर्ष में प्रदेश की संचयी औद्योगिक विकास दर 9.82 प्रतिशत रही। इस दौरान अखिल भारतीय औद्योगिक विकास दर 6.83 प्रतिशत रही। पिछले वर्ष 2011-12 में मध्यप्रदेश ने 8.05 प्रतिशत औद्योगिक विकास दर हासिल की, जबकि अखिल भारतीय औद्योगिक विकास दर 3.95 प्रतिशत ही रही।
उद्योगपति और व्यवसायी कहीं पैसा लगाने के पहले यह देखता है कि उसे लाभ होगा कि नहीं। मध्यप्रदेश में प्रचुर प्राकृतिक संपदा और निवेश की संभावनाएँ सदा से उपलब्ध रही हैं। दुर्भाग्य यह रहा कि देश-विदेश के निवेशकों को इससे परिचित करवाने का कोई ठोस प्रयास ही नहीं किया गया। हमारी सरकार ने इस कार्य को एक मुहिम के रूप में किया और इसके बहुत अच्छे परिणाम सामने आये हैं। हमने उद्योग और निवेश हितैषी नीतियाँ लागू की और प्रक्रियाओं को सरल बनाया। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और मैंने विभिन्न देशों की यात्राएँ की और निवेशकों को मध्यप्रदेश की खूबियों के बारे में बताया।
हमने संभावित निवेशकों को अवगत करवाया कि मध्यप्रदेश में निवेश के क्या-क्या लाभ हैं। प्रदेश में 11 कृषि जलवायु क्षेत्र हैं, लौह अयस्क, हीरा, ताम्र अयस्क, मैगनेशियम अयस्क, चूना पत्थर, कोयला, संगमरमर, ग्रेनाइट आदि के प्रचुर भंडार हैं। देश का 12 प्रतिशत से अधिक का वन क्षेत्र मध्यप्रदेश में है। देश का 7 प्रतिशत से अधिक कोयला भंडार भी मध्यप्रदेश में है। मध्यप्रदेश तिलहन और दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। यहाँ अच्छे किस्म का गेंहूँ और आलू होता है। लहसुन और धनिया का सबसे ज्यादा उत्पादन मध्यप्रदेश में होता है। इसके अलावा मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थ्ति है जहाँ से पूरे देश में आना-जाना और माल परिवहन आसान है। मध्यप्रदेश में कुशल श्रम शक्ति कम खर्च पर उपलब्ध है और औद्योगिक शांति भी यहाँ मौजूद है। मध्यप्रदेश में उद्योगों को 24 घंटे बिजली दी जा रही है। उन्हें हमने मध्यप्रदेश की और भी विशेषताएँ बतलार्इं और निवेश की संभावनाओं से अवगत करवाया। परिणाम स्वरूप देश-विदेश के निवेशक प्रदेश में निवेश करने के लिए आगे आये।
इन्वेस्टर्स समिट के अच्छे परिणाम
मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाओं को देश-विदेश के निवेशकों के सामने उजागर किया गया। इसके लिये दो ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और तीन रीजनल इन्वेस्टर्स समिट की गई।
मध्यप्रदेश में विभिन्न इनवेस्टर्स समिट में उद्योगों की स्थापना के लिये किये गये करारनामों के क्रियान्वयन पर तेजी से काम चल रहा है। फलस्वरूप निवेश प्रस्ताव में से 50 प्रतिशत से अधिक राशि की परियोजनाओं का क्रियान्वयन हो गया है। इन समिटों में कुल 7 लाख 36 हजार 955 करोड़ 97 लाख रुपये निवेश के लिये करार किये गये। इनमें से 3 लाख 2 हजार 871 करोड़ 25 लाख से अधिक के प्रस्तावों पर निर्माण कार्य विभिन्न चरण में है। कुल 487 करारनामों में से 389 पर कार्य शुरू हो गया है।
अभी तक, 21 हजार 329 करोड़ रुपये लागत के 45 उद्योगों ने उत्पादन शुरू कर दिया है। इनमें से 34 करारनामे इंदौर इन्वेस्टर्स समिट तथा अन्य इन्वेस्टर्स मीट में, 8 ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट खजुराहो-क्ष्क्ष् तथा 2 करार खजुराहो समिट के बाद किये गये थे।
इसके अलावा, 63 हजार 525 करोड़ 94 लाख रुपये के निवेश से 30 उद्योगों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। साथ ही, 96 उद्योगों का क्रियान्वयन प्रारंभ हो गया है, जिनमें 2 लाख 45 हजार 671 करोड़ 91 लाख रुपये का पूँजी निवेश हो रहा है। इन्हें जमीन, खनिज, पानी आदि सुविधाएँ मुहैया हो गयी हैं। कुल 218 उद्योगों के लिये सर्वे कार्य शुरू हो गया है।
करार की शर्तों को पूरा न करने अथवा अन्य कारणों से एक लाख 24 हजार 216 करोड़ निवेश प्रस्ताव के शेष करारनामों को निरस्त कर दिया गया है।
उद्योग और रोजगार
औद्योगिक विकास के लिए निर्मित अच्छे वातावरण के चलते मध्यप्रदेश में वर्ष 2004-05 से वर्ष 2011-12 तक एक लाख से ज्यादा सूक्ष्म और लघु उद्यमों की स्थापना हुई। इनमें 15 हजार 584 करोड़ से अधिक का निवेश हुआ तथा 2 लाख 61 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला।
इसी तरह वर्ष 2004-05 से वर्ष 2011-12 तक प्रदेश में 165 बड़े और मध्यम उद्योग लगे। इनमें लगभग 26 हजार 924 करोड़ रुपये का निवेश हुआ और 34 हजार 750 से अधिक लोगों को रोजगार मिला।
इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट
आगामी 28 से 30 अक्टूबर तक इंदौर में तीसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की जा रही है। इसके पीछे हमारी लम्बी तैयारियाँ हैं। हमने निवेश के नये क्षेत्रों को खुला है। अनेक नई नीतियाँ लागू की हैं और पुरानी नीतियों में जरूरत के मुताबिक संशोधन किए हैं। उद्योगपतियों और निवेशकों में इस समिट को लेकर बहुत उत्साह है। मुझे पूरी आशा है कि मध्यप्रदेश के विकास की दिशा में यह समिट मील का पत्थर साबित होगी।

— इस लेख के कैलाश विजयवर्गीय मध्यप्रदेश शासन के उद्योग, वाणिज्य, सूचना प्रौद्योगिकी, रोजगार एवं प्रशिक्षण तथा उद्यानिकी मंत्री हैं।

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