शिवराजसिंह चौहान को आदर्श मुख्यमंत्री का सम्‍मान

भोपाल, जनवरी 2015/ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भारतीय छात्र संसद द्वारा महाराष्ट्र के पुणे में एक भव्य कार्यक्रम में आदर्श मुख्यमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद और छत्रपति शिवाजी की माँ जीजाबाई के जन्म दिवस पर इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के समापन समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस सहित पद्म विभूषण डॉ. रघुनाथ ए. माशेलकर, प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. विजय भटकर, सांसद एवं प्रसिद्ध उद्योगपति डॉ. अभय फिरोदिया सहित अनेक गणमान्य विभूति की मौजूदगी में पाँचवीं भारतीय छात्र संसद में आदर्श मुख्यमंत्री का पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री लोबसांग सांगेय विशेष रूप से मौजूद थे।

श्री चौहान ने सम्मान के जवाब में कहा कि मुख्यमंत्री या सामाजिक जीवन में प्राप्त कोई भी पद दम्भ या अहंकार के लिये नहीं बल्कि देश और प्रदेश की सेवा के लिये होता है। मुख्यमंत्री ने करतल ध्वनि के बीच अपने संबोधन में बीमारू से आज विकसित हुए मध्यप्रदेश की कहानी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद उनके प्रेरणा-स्रोत हैं। सबको जीवन में संकल्प करना चाहिये कि कैसे मानव-जीवन में सर्वश्रेष्ठ करें। भारत मत-मतांतर का देश है, किन्तु ऐसा राष्ट्र है जो सभी के सुखी, निरोगी होने, सबके मंगल-कल्याण की कामना करता है। वह यह भी मानता है कि चाहे जिस रास्ते पर चलो अंत में पहुँचोगे एक ही परमात्मा के द्वार पर। यदि दुनिया में सभी इन आदर्शों को अपना लें तो सारे झगड़े स्वमेव समाप्त हो जायेंगे। भारत इन्हीं आदर्शों के बल पर विश्व को मानवता का दिग्दर्शन करवायेगा।

मैंने जनता को आराध्य मानकर मध्यप्रदेश की सेवा की है। मध्यप्रदेश को मंदिर, जनता को भगवान और अपने आप को इस मंदिर के पुजारी के रूप में स्वीकार किया है। मेरे मुख्यमंत्री बनने के बाद मध्यप्रदेश ने बीमारू राज्य से विकसित राज्य की ओर तेजी से कदम बढ़ाये। आज विकास दर में देश का नम्बर एक राज्य है और कृषि विकास दर में तो देश ही नहीं विश्व में सबसे आगे है। उस समय 2900 मेगावाट बिजली का उत्पादन आज 12000 मेगावाट तक पहुँच गया है। जहाँ कभी-कभी बिजली आती थी, आज वहीं 24 घंटे बिजली का चमत्कार हो रहा है। सिंचाई 7.5 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 30 लाख हेक्टेयर हो गयी। मालवा को रेगिस्तान बनने से बचाने के लिये क्षिप्रा को नर्मदा से जोड़ने का चमत्कार भी मध्यप्रदेश में हुआ है। खेती को लाभ का धंधा बनाया गया है। किसानों को जीरो प्रतिशत ब्याज पर ऋण दिया जा रहा है। इसका परिणाम है कि लगातार तीसरी बार कृषि कर्मण अवार्ड मध्यप्रदेश को मिला है।

श्री चौहान ने कहा कि अब कृषि के साथ उद्योग धंधों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इनमें बड़े उद्योगों के साथ छोटे उद्योग भी मध्यप्रदेश में स्थापित होंगे। इसके लिये मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना प्रारंभ की गयी है जिसमें 10 लाख से एक करोड़ तक का ऋण प्रदेश सरकार की गारंटी पर युवाओं को दिया जाता है। युवा उद्यमियों के लिये 100 करोड़ रुपये के वेंचर केपिटल फण्ड की स्थापना की गयी है। अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण, गरीबों को दिये जाने वाले एक रुपये किलो गेहूँ-चावल, एजुकेशन लोन का भी जिक्र किया। गुड गवर्नेंस का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार को समाप्त करना उनका लक्ष्य है। इसके लिये मध्यप्रदेश में ई-टेंडरिंग, ई-मेजरमेंट और ई-पेमेंट की व्यवस्था की गई है।

श्री चौहान की अपील पर छात्र संसद ने करतल ध्वनि से प्रस्ताव पारित किया कि संविधान में संशोधन कर पाँच वर्ष में सभी स्तर के चुनाव एक साथ करवाये जायें। उन्होंने यह प्रस्ताव भी पारित करवाया कि महँगे चुनाव से बचत के लिये स्टेट फंडिंग की व्यवस्था होनी चाहिये। अपने उदबोधन के अंत में स्वामी विवेकानंद के शब्दों का उल्लेख करते हुए युवाओं से आव्हान किया कि उठो, जागो और जब तक लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाये, तब तक रुको नहीं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने कहा कि वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चौहान को आदर्श मुख्यमंत्री के रूप में देखते हैं। वे महाराष्ट्र में भी वैसा ही शासन चलायेंगे जैसा मध्यप्रदेश में श्री शिवराज सिंह चौहान चला रहे हैं। इसकी शुरूआत करते हुए उन्होंने मध्यप्रदेश की तर्ज पर भ्रष्टाचारियों की सम्पत्ति जप्‍त करने का निर्णय लिया है। महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी के विवेकानंद मंडप में आयोजित छात्र संसद को डॉ. विजय भटकर, डॉ. रघुनाथ ए. माशेलकर और डॉ. अभय फिरोदिया, श्री विश्वनाथ कराड़ तथा छात्र नेताओं ने भी संबोधित किया।

प्रारंभ में छात्र संसद के संस्थापक राहुल वी. कराड़ ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने छात्र संसद के उद्देश्य बताते हुए कहा कि हर क्षेत्र के अच्छे युवा राजनीति में भी प्रवेश करें। बताया कि भारत के प्राय: सभी राजनैतिक दलों में भारतीय छात्र संसद से निकले विद्यार्थी हैं।

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