सहकारी बेंकों के अध्यक्ष तकनीक का उपयोग करें

भोपाल, फरवरी 2015/ बदलते परिवेश में जिला सहकारी बेंकों को भी आधुनिकीकरण और नवाचारों को अपनाकर कार्पोरेट बेंकों के साथ प्रतिस्पर्धा में आगे आना होगा। बेंकों की कार्यशाला और प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर बनाकर इस चुनौती का सफलतापूर्वक मुकाबला किया जा सकता है। सहकारिता मंत्री गोपाल भार्गव ने यहाँ जिला सहकारी केन्द्रीय बेंकों के नव-निर्वाचित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं संचालकों की एक-दिवसीय सक्षमता विकास प्रशिक्षण कार्यशाला के शुभारंभ में यह बात कही। श्री भार्गव ने दीप जलाकर कार्यशाला का शुभारंभ किया।

अपेक्स बेंक ट्रेनिंग कॉलेज और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बेंक (नाबार्ड) की इस कार्यशाला में भागीदारी के लिये विशेष रूप से भोपाल आये नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. हर्ष कुमार भानवाला ने कहा कि बेंकिंग की नई टेक्नालॉजी से जुड़कर ही सहकारी बेंक प्रतिस्पर्धा में सफल हो सकते हैं। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि सहकारी बेंकों को कोर-बेंकिंग प्रणाली से जोड़ने में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य है। उन्होंने कहा कि सहकारी बेंक अपने काम-काज में पारदर्शिता का ख्याल रखें और भावी पीढ़ी को अपनी सेवाओं से जोड़ने नई-नई टेक्नालॉजी का उपयोग करें। इस अवसर पर प्रमुख सचिव सहकारिता अजीत केसरी, अध्यक्ष विपणन संघ रमाकांत भार्गव और सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी प्रभात पाराशर मौजूद थे। अध्यक्ष, अपेक्स बेंक भँवरसिंह शेखावत ने शॉल और श्रीफल भेंटकर अतिथियों का स्वागत किया।

मंत्री ने कहा कि प्रदेश के किसानों को साधन सम्पन्न और आत्म-निर्भर बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने सहकारी बेंकों के जरिये किसानों को जीरो प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध करवाने की पहल की है। गत वर्ष 2013-14 में 13 हजार करोड़ के फसल ऋण वितरित किये गये हैं। इस वर्ष 15 हजार करोड़ के ऋण वितरण का लक्ष्य है। किसानों को समय पर उर्वरक और कृषि आदान उपलब्ध करवाकर प्रदेश के कृषि विकास में सहकारी क्षेत्र ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। खाद्यान्न उपार्जन और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सफल क्रियान्वयन में भी सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। मध्यप्रदेश को पिछले तीन वर्ष से लगातार कृषि कर्मण अवार्ड हासिल हुआ है। वर्तमान में मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है। उम्मीद है आने वाले वर्षों में हमारा राज्य कृषि उत्पादन में देश में पहले स्थान पर होगा। श्री भार्गव नाबार्ड अध्यक्ष डॉ. भानवाला से आग्रह किया कि प्रदेश को न्यूनतम 75 प्रतिशत कृषि पुनर्वित्त मिले और सहकारी क्षेत्र की 192 करोड़ लागत की परियोजनाओं के लिये 50 प्रतिशत अनुदान नाबार्ड मुहैया करवाये। सभी नव-गठित 12 जिले में जिला सहकारी बेंक की स्थापना की मंजूरी शीघ्र मध्यप्रदेश को प्रदान की जाये।

अपेक्स बेंक अध्यक्ष भँवरसिंह शेखावत ने कहा कि देश के सहकारिता आंदोलन में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रदेश में किसानों को जीरो ब्याज दर पर 18 हजार करोड़ रुपये की ऋण सहायता मुहैया करवाई गई है। इससे 65 हजार से अधिक किसान परिवार लाभान्वित हुए हैं। पिछले 40 वर्ष के बाद पहली बार राज्य के सभी 39 जिला सहकारी बेंक और अपेक्स बेंक को भारतीय रिजर्व बेंक द्वारा बेंकिंग लायसेंस जारी किये गये हैं। राज्य के अधिकतर सहकारी बेंक लाभ अर्जित कर रहे हैं। कार्यक्रम को नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक राजेन्द्र कुलकर्णी ने भी संबोधित किया। प्रबंध संचालक अपेक्स बेंक प्रदीप नीखरा ने आभार व्यक्त किया।

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