साढ़े तीन करोड़ के प्रिंटिंग के बिलों का मामला ईओडब्ल्यू को

भोपाल। राज्य शासन ने पिछड़ा वर्ग के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति में लगने वाले प्रपत्रों एवं जाति प्रमाण-पत्रों के मुद्रण के विगत तीन वर्ष के साढ़े तीन करोड़ रुपये के देयकों को संदेहास्पद पाये जाने पर प्रकरण को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को सौंपा है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्री अजय विश्‍नोई के निर्देश पर उक्त कार्रवाई पिछड़ा वर्ग आयुक्त रघुवीर श्रीवास्तव द्वारा की गई है।

पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा छात्रवृत्ति के उक्त प्रपत्रों एवं प्रमाण-पत्रों का मुद्रण शासकीय मुद्रणालय द्वारा कराया जाता है। चालू साल में छात्रवृत्ति प्रपत्रों के मुद्रण का कार्य पूर्वानुसार शासकीय मुद्रणालय को सौंपा गया था। मुद्रण कार्य के बाद शासकीय मुद्रणालय से मेसर्स, हेल्पलाईन, प्राइवेट लिमिटेड के बिल सत्यापित होकर प्राप्त हुए थे। एक शिकायत के आधार पर जब इन बिलों की जाँच की गई तो उन्हें संदेहास्पद पाया गया। श्री अजय विश्‍नोई के निर्देश पर विभाग द्वारा प्रकरण की जाँच कर तत्काल प्रकरण को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दिया गया है।

इसी क्रम में विभाग को 2011-12 में मेसर्स प्रियंका प्रिंटर्स, भोपाल एवं वर्ष 2010-11 में मेसर्स प्राथमिक नरसिंह सहकारी प्रिंटिंग प्रेस, नरसिंहपुर के बिल शासकीय मुद्रणालय से सत्यापित होकर प्राप्त हुए थे। उक्त देयकों के भी संदेहास्पद पाये जाने पर श्री विश्‍नोई के निर्देश पर प्रकरण तैयार कर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को सौंपा गया है। इन तीन वर्ष में विभाग द्वारा 3 करोड़ 50 लाख रुपये के छात्रवृत्ति प्रपत्रों का मुद्रण कराया गया है। विभाग को छात्रवृत्ति के प्रपत्र मुद्रित होकर प्राप्त हुए थे, जिनके आधार पर जिलों में छात्रवृत्ति स्वीकृत की जाकर छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का भुगतान भी किया जा चुका है।

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