सूचना प्रौद्योगिकी निवेश नीति-2012 में संशोधन

भोपाल, सितम्बर 2014/ मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश की सूचना प्रौद्योगिकी नीति-2012 में संशोधन और नवीन बीपीओ/बीपीएम उद्योग नीति-2014 के प्रारूप मंत्रि-परिषद् की बैठक में मंजूरी दी गई। यह पहल अगले माह इंदौर में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के संदर्भ में की गई है।

सूचना प्रौद्योगिकी निवेश नीति-2012 में छूट/ प्रोत्साहन संबंधी प्रावधानों में संशोधन किये गये हैं। इनके अनुसार मध्यप्रदेश में कार्यरत आईटी इकाइयों को गुणवत्ता प्रमाणीकरण (आईएसओ-9001 अथवा उच्चतर) प्राप्त करने में लगी वास्तविक लागत की प्रतिपूर्ति की जा सकेगी। परियोजना लागत के अनुरूप रियायती दरों पर दी जाने वाली भूमि के स्लेब 4 से घटाकर 2 किये गये हैं। इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर मेन्युफेक्चरिंग इकाइयों के लिये प्रति एकड़ 50 इंजीनियर/ आईटी/आईटीईएस प्रोफेशनल्स को रोजगार देना अनिवार्य होगा।

संशोधन के अनुसार समुचित प्राधिकारी से अनुमति के बाद निवेशक इकाइयों के लिये लीज पर आवंटित भूमि पर निर्मित भवन/ स्थान में से आईटी गतिविधियों के लिये तृतीय पक्ष को स्थान लायसेंस आधार पर दे सकेगा। मध्यप्रदेश में 10 करोड़ तक का निवेश करने वाली नवीन आईटी इकाइयों को 7 वर्ष तक प्रतिवर्ष 4 लाख तथा अधिकतम सीमा तक 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान की पात्रता होगी। 10 करोड़ तक का निवेश करने वाली इकाइयों को एक बार निवेश के 25 प्रतिशत पूँजीगत अनुदान की पात्रता होगी। नवीन आईटी इकाइयों को वेट और केन्द्रीय विक्रय कर की राशि पर इनपुट टैक्स रिबेट को समायोजित करने के बाद प्रोत्साहन सहायता दो वर्ग में दी जायेगी।

आईटी इकाइयों को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय/ अन्तर्राष्ट्रीय आई टी सेमीनारों, प्रदर्शनियों में शामिल होने तथा वहाँ अपना स्टॉल लगाने की स्थिति में प्रतिवर्ष एक बार स्टॉल के वास्तविक किराये पर 50 प्रतिशत अनुदान की प्रतिपूर्ति की पात्रता होगी। यह नीति अब वर्ष 2019 तक अथवा नई नीति की घोषणा होने तक लागू रहेगी।

नवीन बीपीओ/बीपीएम उद्योग निवेश नीति-2014 में कुछ सुविधाओं को छोड़कर शेष सभी सुविधाएँ संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी नीति-2014 के अनुसार प्राप्त होगी। इसके अनुसार राज्य शासन द्वारा बीपीओ/बीपीएम उद्योगों के लिये छोटे भू-खण्ड चिन्हांकित किये जायेंगे। साथ ही प्लग एण्ड प्ले सुविधा देने के लिये भवनों का निर्माण भी किया जायेगा। राज्य शासन द्वारा ऐसी गतिविधियों का चिन्हांकन किया जायेगा, जिन्हें मध्यप्रदेश में कार्य करने वाले बीपीओ/बीपीएम उद्योगों को आउटसोर्स किया जा सके।

नवीन बीपीओ/बीपीएम उद्योगों को अपने सेन्टर संचालित करने के लिये उनके द्वारा किराये से भवन लिये जाने पर कारपेट एरिया के 11 रुपये प्रति वर्ग फीट प्रतिमाह की दर से अनुदान की पात्रता होगी।

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